NEET Counselling 2026: MBBS की 2400 नई सीटें बढ़ीं, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों का दबदबा; जानें अपने राज्य का हाल
MBBS Seats Increased: नीट परीक्षा के बाद मेडिकल एडमिशन का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। देश में MBBS की 2,400 नई सीटें बढ़ाई गई हैं, जिसमें प्राइवेट कॉलेजों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
- Written By: आकाश मसने
MBBS की 2400 सीटें बढ़ीं (सोर्स: AI)
MBBS Seats Increased In Medical Colleges: NEET UG परीक्षा के बाद मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का इंतजार कर रहे देश भर के लाखों छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कुल 2,400 नई सीटें बढ़ा दी गई हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के नए सीट मैट्रिक्स के अनुसार, इस सीट वृद्धि का सबसे बड़ा फायदा कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को मिला है।
किस राज्य का क्या है हाल?
महाराष्ट्र में 400 सीटों की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में हुई बढ़ोतरी की तुलना में यह संख्या कम है। वहीं, बिहार, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मेडिकल एजुकेशन के विस्तार में एक बड़ी छलांग है।
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीटों में इस बढ़ोतरी से छात्रों को ज्यादा मौके मिलेंगे। हालांकि, डॉक्टरों की क्वालिटी, फैकल्टी की उपलब्धता और हॉस्पिटल की सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।हालांकि, इस बड़ी खुशखबरी के पीछे एक ऐसा कड़वा सच भी छिपा है जो मिडिल क्लास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों की चिंता बढ़ा सकता है।
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प्राइवेट सेक्टर का दबदबा: 83% सीटें निजी कॉलेजों में बढ़ी
इस साल मेडिकल कॉलेजों में MBBS की बढ़ी कुल 2,400 सीटों का यदि विश्लेषण करें, तो एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आता है। कुल नई सीटों में से 2,000 सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में बढ़ी हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के हिस्से में महज 400 सीटें ही आई हैं। यानी कुल बढ़ोतरी में 83 फीसदी से ज्यादा योगदान निजी क्षेत्र का है। इस नए बदलाव के बाद अब देश में मेडिकल सीटों का गणित पूरी तरह बदल गया है।
- कुल सरकारी सीटें: 63,296
- कुल प्राइवेट सीटें: 73,643
अब देश में सरकारी सीटों के मुकाबले प्राइवेट सीटों की संख्या काफी अधिक हो गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइवेट कॉलेजों में सीटें बढ़ना स्वागत योग्य तो है, लेकिन इससे आम छात्रों को कितना फायदा होगा, इस पर सवालिया निशान है। प्राइवेट कॉलेजों की सालाना फीस लाखों में होती है, जिसे चुकाना हर किसी के बस की बात नहीं है।
प्राइवेट कॉलेजों की फीस लाखों में
अब देश की कुल MBBS सीटों में सरकारी कॉलेजों की तुलना में प्राइवेट कॉलेजों की हिस्सेदारी ज्यादा है। हेल्थकेयर सेक्टर के जानकारों का कहना है कि सीटों में बढ़ोतरी स्वागत योग्य है, लेकिन कई प्राइवेट कॉलेजों में सालाना फीस लाखों रुपये होने का मतलब है कि इस विस्तार से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बहुत कम फायदा होगा। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ने की रफ्तार तुलनात्मक रूप से धीमी है।
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MBBS की सीटों में बढ़ोतरी पर क्या बोले एक्सपर्ट?
मुंबई के कामा एंड एल्ब्लेस हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. तुषार पाल्वे ने कहा कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। मजबूरी में उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए दूसरी जगहों पर जाना पड़ता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें न बढ़ने से स्थिति और भी खराब हो गई है। अगर सिर्फ प्राइवेट कॉलेजों में सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो सरकार को क्या फायदा होता है? गरीब छात्रों को भी कोई फायदा नहीं होता।
