

Sant Dnyaneshwar Spiritual Summit In Mumbai: संत ज्ञानेश्वर के विचार सिर्फ आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं, बल्कि आज की शिक्षा और युवा पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी में आयोजित विद्वत परिषद में इसी विचार पर गहन मंथन हुआ।
संत ज्ञानेश्वर माऊली की 750वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस परिषद में साहित्य, दर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लेकर जनसंवाद तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि आज ऐसी शिक्षा की जरूरत है, जो व्यक्ति को केवल ज्ञान न दे, बल्कि ज्ञान से विवेक की ओर ले जाए।
मुंबई यूनिवर्सिटी में संत ज्ञानेश्वर माऊली की 750वीं जयंती वर्ष के अवसर पर 4 सितंबर को ‘ज्ञानेश्वर माऊली विद्वत परिषद 2026’ का आयोजन किया गया। महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग और मुंबई यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में विद्यानगरी स्थित विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस परिषद में संत ज्ञानेश्वर के साहित्य, दर्शन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनसंवाद के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, साहित्य प्रेमियों और अन्य लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिषद का उद्घाटन महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने किया।
इस अवसर पर मुंबई यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. रवींद्र कुलकर्णी, प्र-कुलगुरु प्राचार्य डॉ. अजय भामरे और साहित्य अकादमी, महाराष्ट्र राज्य के सहसंचालक सचिन निंबालकर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आशिष शेलार ने कहा कि संत ज्ञानेश्वर के विचार आज की पीढ़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर ने कम उम्र में लोक साहित्य को समृद्ध किया और शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शेलार ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो व्यक्ति को केवल जानकारी और ज्ञान तक सीमित न रखे, बल्कि उसे ज्ञान से विवेक की ओर ले जाए।
मुंबई यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. रवींद्र कुलकर्णी ने कहा कि ‘ज्ञानेश्वरी’ में मनुष्य के मन, भावनाओं और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने की बड़ी शक्ति है। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर के विचारों को युवाओं तक पहुंचाने को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
विद्वत परिषद के माध्यम से संत ज्ञानेश्वर के साहित्य और दर्शन को आधुनिक संदर्भों में समझने तथा नई पीढ़ी तक उनके विचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।