

Dharav Redevelopment Plots By 2030: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र की झोपड़पट्टियों के कायापलट के लिए बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक एमएमआरए में एसआरए के 5.09 लाख आवास बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
50 एकड़ से बड़े भूखंडों पर योजना को गति दी जाएगी। वहीं, धारावी पुनर्विकास में केवल पक्के घर देने के बजाय स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी सुरक्षित रखने पर जोर होगा।
अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार का फोकस अब सिर्फ झोपड़पट्टी हटाने पर नहीं, बल्कि घर, रोजगार और बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ पूरी जीवनशैली बदलने पर है।
एसआरए के अनुसार वर्ष 2026 में 90,264, वर्ष 2027 में 1,48,219, वर्ष 2028 में 2,44,356 और वर्ष 2029 में 3,61,026 घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। दिसंबर 2030 के अंत तक कुल 5 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा करने की योजना है।
इसके लिए मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े भूखंडों का चयन कर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
शहर में 50 एकड़ या उससे बड़े भूखंडों पर चॉल पुनर्विकास योजना चलाने की भी तैयारी है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के बड़े भूखंडों का चयन किया गया है। योजना के तहत पुनर्विकास के साथ स्थानीय निवासियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत केवल आवास निर्माण तक सीमित न रहते हुए स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। परियोजना क्षेत्र में मौजूद उद्योगों और छोटे व्यवसायों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विकास की योजना तैयार की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य है कि पुनर्विकास के दौरान स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।
योजना के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले परियोजना प्रभावित परिवारों को मुफ्त घर उपलब्ध कराए जाएंगे। धारावी में तय कटऑफ तिथि तक आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति रखने वाले परिवारों के पुनर्वास के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। पात्र परिवारों को 300 वर्ग फुट तक का मुफ्त घर देने की योजना है।
एसआरए प्रशासन ने अपनी सेवाओं को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है। तीन चरणों में ऑनलाइन प्रणाली, भू-अभिलेख, मंजूरी प्रक्रिया और अन्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे आवेदन, मंजूरी और परियोजनाओं की निगरानी को आसान बनाने का लक्ष्य है।
मुंबई के बढ़ते आवास संकट को देखते हुए एसआरए की यह योजना शहर की झुग्गी बस्तियों और पुनर्विकास परियोजनाओं की तस्वीर बदलने वाली मानी जा रही है।