

मुंबई के 7 कोलीवाड़ों के सीमांकन के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित।
12 साल से लंबित मुद्दे पर सरकार ने उठाया कदम।
समिति को 3 महीने में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
शिवड़ी, सायन, कोलाबा, माहिम, मांडवी, वर्ली और कफ परेड शामिल।
कोली समुदाय की जमीनों और अधिकारों के संरक्षण पर जोर।
Mumbai Seven Koliwadas Demarcation Committee: मुंबई के सात कोलीवाड़ों के सीमांकन का करीब 12 साल से लंबित मुद्दा सुलझाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सीमांकन से जुड़े विवादों और आपत्तियों पर विचार करने के लिए कोंकण विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशों सहित रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
सरकार की ओर से गठित समिति मुंबई के शिवड़ी, सायन, कोलाबा, माहिम (माहिम मार्केट सहित), मांडवी-प्रिंसेस डॉक, वर्ली और कफ परेड कोलीवाड़ों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बनाई गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर यह निर्णय लिया गया है।
सीमांकन पूरा होने से इन क्षेत्रों के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ने और कोली समुदाय की जमीनों के संरक्षण को मदद मिलने की उम्मीद है।
समिति में कोंकण विभाग के आयुक्त के अलावा आयुक्त, बंदोबस्त एवं संचालक, भूमि अभिलेख, महाराष्ट्र राज्य, पुणे के अतिरिक्त नगर आयुक्त (शहर), मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक तथा मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहायक आयुक्त शामिल हैं। कोंकण प्रदेश के भूमि अभिलेख उपनिदेशक को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
सातों कोलीवाड़ों का स्थल सर्वेक्षण और माप पूरा होने के बाद सीमांकन के नक्शे तैयार किए गए थे। हालांकि, इन नक्शों में दर्शाई गई सीमाओं को लेकर विभिन्न प्राधिकरणों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसी वजह से सीमांकन को अंतिम रूप देने में देरी हुई।
अब समिति संबंधित आपत्तिकर्ताओं और कोली संगठनों के प्रतिनिधियों का पक्ष सुनेगी। इसके बाद सीमांकन को अंतिम रूप देने के लिए सरकार को सिफारिशें भेजी जाएंगी। समिति 9 सितंबर 2024 को राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई पर भी विचार करेगी।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कोली समुदाय मुंबई का मूल निवासी है और उसके अधिकारों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित करने और किसी के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना विकास कार्य जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।