

Maharashtra Government Tanker Airlift Plan: महाराष्ट्र के सबसे व्यस्त मार्ग, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हाल ही में हुए एक भीषण गैस टैंकर हादसे ने प्रशासन की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिए थे। इस हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर करीब 36 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा, जिससे हजारों यात्री बीच रास्ते में फंस गए। इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अब एक क्रांतिकारी 'इमरजेंसी प्रोटोकॉल' तैयार करने का निर्णय लिया है। शनिवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो भविष्य में राजमार्ग सुरक्षा की तस्वीर बदल सकती हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन को सूचित किया कि सरकार अब कुछ विकसित देशों की तर्ज पर एक विशेष तकनीक की पड़ताल कर रही है। इसके तहत, यदि राजमार्ग पर कोई ज्वलनशील पदार्थ ले जा रहा टैंकर दुर्घटनाग्रस्त होता है और रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, तो उसे 'एयरलिफ्ट' करने की व्यवहार्यता जांची जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अत्यधिक आपात स्थिति में क्षतिग्रस्त टैंकरों को जल्द से जल्द हटाना प्राथमिकता होगी ताकि घंटों लगने वाले जाम से बचा जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में हेलीकॉप्टर उपलब्ध हैं, लेकिन रात्रि उड़ान प्रतिबंधों के कारण परिचालन संबंधी कुछ बाधाएं आ सकती हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस हादसे के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बना 'टोल वसूली'। जब मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 36 घंटे तक जाम रहा, तब भी वहां से गुजरने वाले वाहनों से टोल लिया गया, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सदन में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि जाम की अवधि के दौरान वसूला गया सारा टोल वापस किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मैनुअल टोल की वापसी प्रक्रिया तुरंत पूरी कर ली गई थी, और अब 'फास्टैग' (FASTag) के माध्यम से वसूले गए 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी सीधे वाहन मालिकों के खातों में वापस कर दी जाएगी।
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक आदित्य ठाकरे ने खतरनाक पदार्थों की ढुलाई के दौरान होने वाले हादसों से निपटने की तैयारियों पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में सरकार ने अब एक नई 'मानक परिचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार करने का आदेश दिया है। अब एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों को अपने टैंकरों के साथ पर्याप्त बचाव उपकरण और परिभाषित आपातकालीन प्रोटोकॉल रखने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, भविष्य में यात्रियों को वास्तविक समय की जानकारी देने के लिए 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) को अपग्रेड किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रभावित मार्गों की जानकारी SMS अलर्ट और डिजिटल साइनबोर्ड के जरिए प्रसारित की जाएगी ताकि चालक समय रहते वैकल्पिक रास्ता चुन सकें। अग्निशमन प्रणालियों को भी खंडाला घाट जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में और अधिक मजबूत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह पूरी कवायद 3 फरवरी को पर्वतीय खंडाला घाट खंड में हुए हादसे के बाद शुरू हुई है। वहां एक गैस टैंकर चालक के नियंत्रण खो देने के बाद पलट गया था। अधिकारियों के अनुसार, यदि गैस रिसाव या आग लगती, तो एक बड़ी तबाही हो सकती थी, जिसे त्वरित कार्रवाई से टाल दिया गया, लेकिन इसके कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों का अंबार लग गया था।