अब सिर्फ 48 मिनट में मुंबई से पुणे! रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान- भारत खुद बनाएगा अगली बुलेट ट्रेन

Ashwini Vaishnaw Bullet Train Announcement: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया बड़ा ऐलान, 2027 से शुरू होगा मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का काम। सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा 170 किमी का सफर।
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मुंबई पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का काम (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Pune Bullet Train Project: भारत में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर एक बड़ी घोषणा हुई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 जून 2026 को जानकारी दी कि देश के अगले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर, मुंबई- पुणे मार्ग पर अगले साल  2027 से काम शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे भारत खुद अपनी क्षमता से तैयार करेगा, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

यात्रा समय में भारी कटौती

वर्तमान में मुंबई और पुणे के बीच की दूरी तय करने में घंटों का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद 170 किलोमीटर का यह सफर मात्र 48 मिनट में सिमट जाएगा। रेल मंत्री के अनुसार, इस हाईस्पीड कनेक्टिविटी के कारण मुंबई और पुणे ट्विन सिटी बन जाएंगे, जिससे आर्थिक और सांस्कृतिक आदानप्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि जहां मुंबईअहमदाबाद कॉरिडोर का निर्माण जापान के सहयोग से किया जा रहा है, वहीं मुंबई-पुणे कॉरिडोर का निर्माण भारत स्वयं करेगा। उन्होंने कहा कि अब देश के पास बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स को स्वतंत्र रूप से संभालने की क्षमता है। यह प्रोजेक्ट उन 7 नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है जिनकी घोषणा बजट 202627 में की गई थी।

आर्थिक इकोसिस्टम का विकास

इस नई रेल परियोजना का उद्देश्य केवल यातायात सुगम बनाना नहीं, बल्कि एक मजबूत आर्थिक गलियारा तैयार करना है। रेल मंत्री के मुताबिक, जब मुंबई, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत, वापी और ठाणे जैसे शहर बुलेट ट्रेन से जुड़ेंगे, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा आर्थिक इकोसिस्टम तैयार करेगा। इसके अलावा, पुणे-हैदराबाद के बीच 500 किमी की दूरी भी बुलेट ट्रेन के जरिए मात्र 2 घंटे 8 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

अन्य प्रोजेक्ट्स की स्थिति

देश के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (मुंबई-अहमदाबाद) का काम भी तेज गति से चल रहा है। इसके पहले सेक्शन, सूरत और वापी के बीच अगस्त 2027 तक परिचालन शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरा कॉरिडोर 2028 तक चालू हो सकता है। इन मार्गों पर ट्रेनें 320 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। सरकार की योजना में दिल्ली-वाराणसी, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर भी शामिल हैं।

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