

Mumbai Police On CJP Protest Case Withdrawal: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मांगों की स्वीकृति के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर अपना आंदोलन वापस ले लिया गया है, लेकिन मुंबई में प्रदर्शनकारियों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। CJP का कहना है कि केंद्र सरकार ने उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR और आपराधिक मामले वापस लेने का भरोसा दिया था, फिर भी मुंबई पुलिस लगातार नामजद लोगों को पुलिस स्टेशन बुलाकर बयान दर्ज करने का नोटिस भेज रही है।
इस विरोधाभास के बाद कई छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स और उनके परिजनों के बीच गहरा भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई है।
मामले पर उपजे विवाद के बाद मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें कोई विरोधाभास या नियमों का उल्लंघन नहीं है। वरिष्ठ अफसरों के मुताबिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े मामलों को वापस लेने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है।
अधिकारियों ने बताया कि जब तक केस में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल नहीं हो जाती, तब तक जांच को बीच में रोकना संभव नहीं है। पुलिस प्रक्रिया के अनुसार, पंचनामा बनाने, आरोपियों-गवाहों के बयान दर्ज करने और चार्जशीट पेश करने के बाद ही स्क्रूटनी कमेटी मामलों को वापस लेने की सिफारिश करती है।
मुंबई पुलिस के अनुसार, राज्य सरकार समय-समय पर एक सरकारी आदेश (GR) जारी करती है, जिसके तहत इस प्रकार के आंदोलनकारी केस वापस लिए जाते हैं। फिलहाल जारी सरकारी आदेश की समय-सीमा 31 जुलाई तक ही सीमित है।
चूंकि मामलों की जांच अभी चल रही है, इसलिए 31 जुलाई से पहले चार्जशीट दाखिल होना मुश्किल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार को इस समय-सीमा को आगे बढ़ाना होगा, जिसके बाद ही चार्जशीट दाखिल कर औपचारिक केस वापसी की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
दूसरी ओर, CJP नेताओं ने सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने का आश्वासन मिला था। उन्होंने मांग की कि सरकार समझौते का तुरंत पालन करे और मंगलवार तक सभी FIR वापस लेने का लिखित समझौता साझा करे।
इधर, गोवंडी निवासी 23 वर्षीय अयान मिर्जा जैसे कई युवाओं को देवनार पुलिस स्टेशन से नोटिस जारी किए गए हैं। CJP प्रदर्शनकारियों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील विक्रांत खरे ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि औपचारिक आदेश आने तक कम से कम अंतरिम निर्देश जारी कर पुलिसिया कार्यवाही रोकी जाए।