सावधान! क्रेडिट कार्ड के नाम पर 'APK' हमला: 10 राज्यों के पीड़ितों को लूटने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Mumbai Police Jamtara Fraud Case: मुंबई पुलिस ने जामताड़ा से मास्टरमाइंड मजहर आलम को गिरफ्तार किया। 8वीं पास ठग ने APK फाइल और गूगल सर्च के जरिए 10 राज्यों में करोड़ों की डिजिटल लूट की।
Mumbai Police Jamtara Fraud Case
Mumbai Police Jamtara Fraud Case प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
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Mazhar Alam Jamtara Fraud Case Mumbai Police: मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने झारखंड के जामताड़ा से एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी तकनीक और चालाकी से 'डिजिटल नटवरलाल' की छवि बना ली थी। महज 8वीं पास होने के बावजूद, 25 वर्षीय मजहर आलम उर्फ इजरायल मियां ने पिछले दो वर्षों में 10 राज्यों के सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया और करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली। जामताड़ा के फुकबांदी गांव से संचालित होने वाला यह गिरोह इतना संगठित था कि इसकी कार्यप्रणाली किसी पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को भी मात दे दे।

मजहर की गिरफ्तारी मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज एक शिकायत के बाद हुई। एपीआई अमित देवकर और उनकी टीम ने 10 दिनों तक झारखंड के बीहड़ों में डेरा डाला और तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए इस मास्टरमाइंड को दबोच लिया। आरोपी के पास से भारी मात्रा में सिम कार्ड, मोबाइल फोन और हजारों क्रेडिट कार्ड धारकों का डेटा बरामद हुआ है, जो उसके व्यापक नेटवर्क की गवाही देता है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसी कार्यप्रणाली और 'हनीट्रैप'

मजहर का ठगी करने का तरीका बेहद आधुनिक था। वह गूगल सर्च इंजन पर विभिन्न प्रतिष्ठित बैंकों के फर्जी 'क्रेडिट कार्ड हेल्पलाइन' नंबर डाल देता था (SEO Manipulation)। जब कोई ग्राहक मदद के लिए सर्च करता, तो उसे बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के बजाय मजहर का नंबर मिलता। कॉल करने पर वह खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ित का विश्वास जीतता और फिर व्हाट्सएप पर 'Credit Card APK' नामक एक घातक फाइल भेजता। जैसे ही पीड़ित इस फाइल को इंस्टॉल करता, उसके फोन का पूरा रिमोट एक्सेस मजहर के कंट्रोल में आ जाता था।

OTP बाईपास और करोड़ों का डिजिटल साम्राज्य

आरोपी द्वारा भेजे गए मालवेयर की सबसे खतरनाक बात यह थी कि यह 'कॉल फॉरवर्डिंग' और 'एसएमएस एक्सेस' के जरिए ओटीपी (OTP) को सीधे मजहर के सर्वर पर भेज देता था। पीड़ित को भनक तक नहीं लगती थी और उसके खाते से पैसे साफ हो जाते थे। इस काली कमाई से मजहर ने जामताड़ा में एक आलीशान बंगला बनाया, 30 लाख रुपये का एक फ्रेंचाइजी शोरूम खोला और महंगी गाड़ियों का काफिला खड़ा कर लिया। वह ठगी के पैसों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी मर्चेंट अकाउंट्स के जरिए 'क्लीन' (मनी लॉन्ड्रिंग) करता था।

94 सिम कार्ड और 10 राज्यों में फैला जाल

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि मजहर ने अपनी पहचान छुपाने के लिए अब तक 94 सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया। उसके खिलाफ अब तक 10 राज्यों से जुड़ी 36 से ज्यादा गंभीर शिकायतें सीधे तौर पर दर्ज पाई गई हैं। मजहर ने ठगी के ये गुर अपने एक रिश्तेदार से सीखे थे, जो पहले से ही मकोका (MCOCA) के तहत जेल काट चुका है। मुंबई पुलिस ने इस मामले में नागरिकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे गूगल पर मिलने वाले किसी भी रैंडम हेल्पलाइन नंबर पर भरोसा न करें और अनजान स्रोतों से मिली APK फाइल को कभी डाउनलोड न करें।

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