

मुंबई रीजन के लिए 2051 तक का वॉटर प्लान तैयार होगा।
डॉ. संजय बेलसरे की अध्यक्षता में विशेषज्ञ कमेटी गठित।
सीवेज रीसाइक्लिंग, लीकेज रोकने और जल परियोजनाओं पर 3 महीने में रिपोर्ट।
Mumbai MMR 25 Year Water Plan: मुंबई रीजन में भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और वर्ष 2051 तक संभावित पानी की किल्लत को जड़ से खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 25 साल का व्यापक वॉटर प्लान तैयार करने का बड़ा कदम उठाया है।
इस दीर्घकालीन योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जल संसाधन विभाग के पूर्व सचिव डॉ. संजय बेलसरे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी सीवेज रीसायकलिंग, पाइपलाइन लीकेज रोकने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के उपायों पर विस्तृत अध्ययन करेगी।
साथ ही 3 माह के भीतर सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी, जिससे पूरे महानगर क्षेत्र को निर्बाध पानी मिल सके। महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में जीआर जारी किया है। अध्ययन समूह की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सचिव डॉ. संजय बेलसरे करेंगे।
समूह में मुंबई बीएमसी, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिकाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल, महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। कोंकण क्षेत्र के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता सदस्य सचिव होंगे। अध्ययन समूह के अध्यक्ष जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों, संस्थाओं, स्थानीय निकायों और विशेषज्ञों को भी बैठकों में आमंत्रित कर सकेंगे।
मुंबई महानगर क्षेत्र में घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2031, 2041 और 2051 के लिए पानी की मांग और संभावित कमी का अनुमान लगाया जाएगा।
अध्ययन समूह इन अनुमानों की तुलना उपलब्ध और भविष्य में मिलने वाले पानी से करेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में कितने पानी की जरूरत होगी और आने वाले वर्षों में कहां कितनी कमी हो सकती है।
मौजूदा बांधों, जलाशयों, नदियों और भूजल की तकनीकी जांच होगी। साथ ही पूरी हो चुकी, निर्माणाधीन और प्रस्तावित जल परियोजनाओं से मिलने वाले अतिरिक्त पानी का हिसाब तैयार होगा।
शोधित सीवेज के पानी का दोबारा इस्तेमाल, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और भूजल पुनर्भरण घर जोर रहेगा, पाइपलाइन रिसाव रोककर गैर-राजस्व जल की बर्बादी न्यूनतम की जाएगी।
अनियमित बारिश, सूखा, अतिवृष्टि और समुद्र स्तर में वृद्धि के असर को देखते हुए एक टिकाऊ और लवीली कार्ययोजना बनेगी।
2051 तक की जरूरतों के अनुसार नई परियोजनाओं की प्राथमिकताएं, अनुमानित बजट, समयसीमा और विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी।