95% मामलों में प्यार बना वजह: मुंबई में नाबालिगों की गुमशुदगी पर पुलिस अलर्ट, 8 महीने में 875 मामले दर्ज

Mumbai Police Missing Minor: मुंबई में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच नाबालिग लड़कियों के लापता होने के 875 मामले दर्ज हुए, जिनमें से पुलिस ने 97% (846) केस सफलतापूर्वक सुलझा लिए हैं।
Love the reason in 95% of cases: Police on alert over disappearance of minors in Mumbai
मुंबई पुलिस नाबालिग गुमशुदगी मिसिंगसोर्स- सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • मुंबई में जनवरी-अगस्त 2026 के दौरान नाबालिग लड़कियों के 875 मामले दर्ज।

  • पुलिस ने 846 मामले सुलझाए, अगस्त में 109 केस दर्ज हुए।

  • हर पुलिस स्टेशन में गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए विशेष स्क्वॉड गठित।

Mumbai Missing Minor Girls: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के मामले पुलिस प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। मुंबई पुलिस के जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच नाबालिग लड़कियों के लापता होने के 875 मामले दर्ज किए गए।

इनमें से 846 मामलों को सुलझाने का दावा किया गया है। यह कुल मामलों का लगभग 96.7 प्रतिशत है। वहीं, अगस्त महीने में गुमशुदगी के 109 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 91 का पता लगाया गया।

हर पुलिस स्टेशन में विशेष मिसिंग स्क्वाड

पुलिस के मुताबिक, नाबालिगों के लापता होने की सूचना मिलने पर तत्काल मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू की जाती है। इसके लिए मुंबई के प्रत्येक पुलिस स्टेशन में विशेष ‘मिसिंग स्क्वाड’ गठित किया गया है। इन टीमों का काम गुमशुदा बच्चों की तलाश करना, उपलब्ध सुरागों की जांच करना और उन्हें सुरक्षित बरामद करना है।

कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लापता होने पर परिस्थितियों के अनुसार अपहरण से संबंधित मामला दर्ज किया जा सकता है। खबर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) का उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के सटीक कानूनी संदर्भ की प्रकाशन से पहले पुष्टि आवश्यक है।

पारिवारिक विवाद और रिश्ते भी वजह

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में लड़कियां अपनी मर्जी से या पारिवारिक विवादों के कारण घर छोड़ देती हैं। हालांकि, नाबालिग होने के कारण पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में राज्य स्तर के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया था कि 2021 से 2026 के बीच लापता महिलाओं के मामलों में लगभग 46.32 प्रतिशत मामले रोमांटिक रिश्तों और 20 प्रतिशत पारिवारिक समस्याओं से जुड़े थे। ये आंकड़े राज्य स्तर के बताए गए हैं, इसलिए इन्हें मुंबई के नाबालिगों के मामलों पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए।

Love the reason in 95% of cases: Police on alert over disappearance of minors in Mumbai
छत्रपति संभाजीनगर में नई सड़क के नीचे दबेगी जलवाहिनी? उठी स्थानांतरण की मांग, पाइप उखाड़े; काम अधूरा

घरेलू हिंसा और सोशल मीडिया के जोखिम

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ परिवारों में मारपीट, भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी परिस्थितियां लड़कियों को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर सकती हैं। वहीं, सोशल मीडिया या निजी संपर्कों के जरिए मिलने वाले झूठे वादे भी नाबालिगों को जोखिम में डाल सकते हैं। ऐसे मामलों में परिवारों और पुलिस की समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।

Love the reason in 95% of cases: Police on alert over disappearance of minors in Mumbai
मुंबई लोकल में बड़ा संकट: 200 से ज्यादा ट्रेनें रद्द, भांडुप में युवक की मौत; कांजुरमार्ग में आग से सिग्नल ठप

सीसीटीवी की मदद से बच्ची की तलाश

मुंबई शहर में गुमशुदा बच्चों की तलाश के दौरान सीसीटीवी फुटेज भी उपयोगी साबित होते हैं। खबर के अनुसार, 21 जुलाई को दादर की हिंदू कॉलोनी से लापता हुई सात वर्षीय बच्ची को माटुंगा पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से तलाश अभियान चलाकर ढूंढ निकाला। इसी दिन शिवड़ी की 13 वर्षीय छात्रा और अगस्त में भिवंडी से लापता हुईं दो 17 वर्षीय किशोरियों के मामलों में भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

नाबालिगों की गुमशुदगी के मामलों में त्वरित शिकायत, प्रभावी जांच और बच्चों की सुरक्षित वापसी सबसे महत्वपूर्ण है। आंकड़ों में बड़ी संख्या में मामले सुलझाए जाने के बावजूद हर मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निरंतर निगरानी और सहायता जरूरी है।

Navbharat Live
navbharatlive.com