'जय हो' की धुन से परेशान हुए लोग, मुंबई की मेलोडी रोड पर लगा ब्रेक! BMC ने अब उठाया ये बड़ा कदम

Mumbai Melody Road: कोस्टल रोड पर बनी भारत की पहली 'मेलोडी रोड' को शोर की शिकायतों के बाद बैरिकेड कर दिया गया है। ब्रीच कैंडी के निवासियों ने 'जय हो' ट्यून पर आपत्ति जताई थी।
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मुंबई मेलोडी रोड (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Melody Road Noise Complain: मुंबई के महत्वाकांक्षी कोस्टल रोड प्रोजेक्ट का सबसे चर्चित हिस्सा यानी 'मेलोडी रोड' अब खामोश होने जा रहा है। उद्घाटन के महज एक महीने के भीतर ही बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने इस संगीतमय स्ट्रेच को बैरिकेड करने का फैसला लिया है। यह निर्णय दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी इलाके में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है।

क्या है विवाद की वजह?

कोस्टल रोड के नॉर्थबाउंड लेन पर स्थित इस 500 मीटर के हिस्से को इस तरह डिजाइन किया गया था कि जब गाड़ियां 70 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती थीं, तो टायरों और सड़क के खांचों के घर्षण से ऑस्कर विजेता गाना 'जय हो' सुनाई देता था। हालांकि, यह नवीन प्रयोग स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बन गया। ब्रीच कैंडी के लगभग 650 परिवारों ने नगर आयुक्त भूषण गगरानी को औपचारिक शिकायत सौंपी, जिसमें कहा गया कि यह आवाज सुबह-शाम उनके घरों की शांति भंग कर रही है।

BMC ने क्या लिया एक्शन?

निवासियों का कहना है कि वे अपने घरों की खिड़कियां तक नहीं खोल पा रहे थे क्योंकि सड़क से आने वाला संगीत एक निरंतर शोर (Noise Pollution) में बदल चुका था। हालांकि, BMC के शुरुआती डेसिबल परीक्षणों में शोर तय सीमा के भीतर पाया गया था, लेकिन जनता के भारी विरोध को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल इसे बंद करने का रास्ता चुना है।

अधिकारियों के अनुसार, इस स्ट्रेच को अभी के लिए बैरिकेड कर दिया गया है। अब यह सड़क केवल विशेष अवसरों या सप्ताहांत पर ही संगीत के लिए खोली जा सकती है। इसके साथ ही, विशेषज्ञों और सलाहकारों को इस तकनीक में सुधार करने या ध्वनि प्रदूषण को कम करने के विकल्प खोजने के निर्देश दिए गए हैं।

6 करोड़ का प्रोजेक्ट पड़ा ठंडा

बता दें कि इस मेलोडी रोड को करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तर्ज पर बनाया गया यह प्रयोग भारत में अपनी तरह का पहला था। लेकिन मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में आवासीय क्षेत्रों के इतने करीब ऐसा प्रयोग करना अब प्रशासन के लिए एक सबक बन गया है। फिलहाल, अधिकारी रात के समय ध्वनि स्तर का पुनर्मूल्यांकन करेंगे ताकि भविष्य का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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