रितु तावड़े और किशोरी पेडनेकर आमने-सामने, पुलिस थाने पहुंचा मेयर और पूर्व महापौर का विवाद

Mumbai Mayor Ritu Tawde Kishori Pednekar Controversy: मुंबई मेयर रितु तावड़े और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर का विवाद आजाद मैदान पुलिस थाने पहुंचा। जानें आरोप-प्रत्यारोप।
Ritu Tawde And Kishori Pednekar
मुंबई मेयर रितु तावड़े और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर के बीच तीखी रार (फोटो क्रेडिट-X)
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Ritu Tawde And Kishori Pednekar Controversy: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के गलियारों से निकलकर मुंबई की प्रथम नागरिक यानी मेयर रितु तावड़े और पूर्व मेयर व वर्तमान विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर के बीच का विवाद अब पुलिस थाने की चौखट तक पहुंच गया है। मेयर रितु तावड़े ने पूर्व महापौर पर उनके आधिकारिक दफ्तर में जबरन घुसने, कर्मचारियों को धमकाने और बेहद गोपनीय व संवेदनशील दस्तावेजों की अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरें खींचने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में मेयर तावड़े ने मध्य मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है, जिससे मुंबई की स्थानीय राजनीति में भूचाल आ गया है।

मेयर की गैर-मौजूदगी में वीडियो बनाने का आरोप

पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए मेयररितु तावड़े ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 3:45 बजे वे मुंबई की सड़कों पर जलभराव और खुले मैनहोल्स के निरीक्षण के लिए फील्ड विजिट पर थीं। उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर कुछ अज्ञात बाहरी लोगों के साथ उनके कार्यालय परिसर में दाखिल हुईं।

तावड़े ने आरोप लगाया, "भले ही पेडणेकर यह दावा करें कि वे मेरे निजी केबिन के अंदर नहीं गईं, लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर पूरा परिसर मेयर कार्यालय का हिस्सा है, जहां दैनिक प्रशासनिक कार्य और महत्वपूर्ण फाइलें रखी होती हैं। उन्होंने वहां तैनात कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की, उन्हें डराया और प्रशासनिक मेज पर रखे गोपनीय पत्रों की तस्वीरें लीं, जो नियमों और कानून के खिलाफ है।"

बचकाने आरोप लगा रही हैं मेयर

दूसरी तरफ, पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें 'बचकाना' और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया है। पेडणेकर ने अपने बचाव में दलील दी कि उनका मेयर तावड़े से कोई व्यक्तिगत मनमुटाव नहीं है।

उन्होंने कहा, "मुंबई में मानसून के दौरान हो रही दर्दनाक दुर्घटनाओं और बुनियादी ढांचे के चरमराने के मुद्दे पर मैंने बीएमसी की एक विशेष जनरल बॉडी मीटिंग बुलाने की मांग करते हुए कई आधिकारिक पत्र लिखे थे। आठ दिन बीत जाने के बाद भी जब सिविक एडमिनिस्ट्रेशन से कोई जवाब नहीं मिला, तो मैं केवल अपने पत्र का स्टेटस जानने मेयर कार्यालय गई थीं। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते प्रशासन से जवाब मांगना मेरा अधिकार है। मैं उस मुख्य कुर्सी के पास भी नहीं गई जहां मेयर बैठती हैं।"

पुलिस जांच पर टिकी निगाहें

पूर्व मेयर की दलीलों पर पलटवार करते हुए रितु तावड़े ने स्पष्ट किया कि मानसून की तैयारियों, जलभराव की समस्या और शहर में पानी की आपूर्ति जैसे गंभीर विषयों पर बीएमसी सदन (BMC House) में पहले ही देर रात तक चली एक विशेष बैठक में विस्तार से चर्चा हो चुकी है। ऐसे में किसी पत्र का बहाना बनाकर मेयर के दफ्तर की तस्वीरें और वीडियो लेना किसी भी तरह कानूनन सही नहीं ठहराया जा सकता।

बहरहाल, आजाद मैदान पुलिस को शिकायत पत्र सौंपे जाने के बाद अब कानूनविदों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इस मामले में आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज करती है या नहीं।

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