

Mumbai Dabbawala Service Modernization Plan: मुंबई की पहचान बन चुकी डब्बेवालों सेवा ने एक बार फिर शहर की सेवा संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया है।
महापौर रितू तावडे ने बांद्रा (पश्चिम) स्थित 'मुंबई डब्बेवाला अंतरराष्ट्रीय अनुभव केंद्र' के दौरे के दौरान डब्बेवालों की कार्यप्रणाली, अनुशासन और समयपालन की सराहना करते हुए उन्हें मुंबई की कार्यसंस्कृति का सच्चा प्रतिनिधि बताया।
महापौर तावड़े ने बताया कि मुंबई में प्रस्तावित प्रवेश द्वारों में से एक को डब्बेवाला थीम पर विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही, डब्बेवालों को जल्द ही 105 ई-बाइक्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और बढ़ेगी। महापौर ने बुधवार की शाम इस केंद्र का सद्भावना दौरा किया।
जहां उन्होंने डिब्बों के वर्गीकरण, कोडिंग और वितरण प्रणाली को नजदीक से देखा। उन्होंने डब्बेवालों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को भी समझा। इस दौरान उन्होंने कहा कि लगभग 135 वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा केवल भोजन पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्कृष्ट प्रबंधन और सामूहिक कार्य का अद्भुत उदाहरण है।
दौरे के बीच एक मानवीय पहलू भी सामने आया, जब डब्बेवाला संगठन के सदस्य दिनेश आरडे को हृदयाघात के बाद कूपर अस्पताल में भर्ती कराया गया। महापौर तुरंत अस्पताल पहुंची और उनकी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह सेवा आज भी लाखों मुंबईकरों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
समय की पाबंदी, टीमवर्क के कारण यह प्रणाली दुनिया भर के प्रबंधन विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बन चुकी है। डब्बेवाला संगठन के प्रतिनिधि किरण गवांदे ने बताया कि यह सेवा 1890 में शुरू हुई थी और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग एक लाख डिब्बों का वितरण किया जाता है।