गैंगस्टर कुमार पिल्लई को हांगकांग वापस भेजने का आदेश; मुंबई की अदालत ने पुलिस को दिए निर्देश, जानें पूरा मामला

Gangster Kumar Pillai News: मुंबई की मकोका कोर्ट ने गैंगस्टर कुमार पिल्लई को उसके देश हांगकांग वापस भेजने का आदेश दिया है। सभी प्रत्यर्पण मामलों में बरी होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
Mumbai court orders police to send gangster Kumar Pillai back to Hong Kong
गैंगस्टर कुमार पिल्लई (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Kumar Pillai Extradition Hong Kong: मुंबई की एक विशेष मकोका (MCOCA) अदालत ने शहर की पुलिस को कथित गैंगस्टर कुमार पिल्लई को उसके देश हांगकांग वापस भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला भारतीय कानूनी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण संधियों के अनुपालन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अदालत का फैसला और कानूनी आधार

विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर ने 13 फरवरी को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कुमार पिल्लई को उन सभी मामलों में बरी कर दिया गया है, जिनके लिए उसे मूल रूप से भारत प्रत्यर्पित (Extradite) किया गया था। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि प्रत्यर्पण करने वाला देश अनुमति नहीं देता है, तो आरोपी पर भारत में किसी अन्य लंबित मामले में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष के पास अब पिल्लै को उसके गृह देश, यानी हांगकांग वापस भेजने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि भारतीय अधिकारियों ने अन्य लंबित मामलों के लिए हांगकांग से अतिरिक्त अनुमति मांगी थी।

कौन है कुमार पिल्लई?

कुमार पिल्लई मूल रूप से भारतीय नागरिक था, लेकिन बाद में वह हांगकांग चला गया और वहां की नागरिकता हासिल कर ली। साल 2012 में उसके खिलाफ 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी किया गया था, जिसके बाद 2016 में उसे सिंगापुर में गिरफ्तार किया गया। भारत सरकार ने सिंगापुर की अदालत से उसके खिलाफ लंबित 6 मामलों में प्रत्यर्पण की मांग की थी, लेकिन सिंगापुर ने केवल 3 मामलों में सुनवाई के लिए उसे भारत भेजने की अनुमति दी थी।

वकील की दलील और अभियोजन का विरोध

पिल्लई के वकील पंकज कावले ने अदालत में तर्क दिया कि प्रत्यर्पण का मूल उद्देश्य अब समाप्त हो चुका है क्योंकि उन 3 मामलों में पिल्लई को बरी कर दिया गया है। उन्होंने यह भी दलील दी कि चूंकि पिल्लई अब भारत का नागरिक नहीं है, इसलिए उसका भारत में रुकना वैध नहीं है और 'प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21' के तहत उसे वापस भेजा जाना अनिवार्य है।

हालांकि, सरकारी वकील ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ अभी भी कई अन्य मामले लंबित हैं। लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि प्रत्यर्पण की शर्तें केवल सीमित मामलों के लिए थीं, जो अब समाप्त हो चुकी हैं।

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