

Ritu Tawde On BMC Hospital New Rule: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के नगर निगम (BMC) संचालित सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुंबई के सिविक अस्पतालों में अब 'एक मरीज, एक रिश्तेदार' नीति को बेहद कड़ाई से लागू किया जाएगा।
इस नए नियम के तहत अब किसी भी मरीज से मिलने या वार्ड में उसके साथ रहने के लिए केवल एक ही रिश्तेदार को अनुमति दी जाएगी। इसके लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा परिजनों को एक डिजिटल विजिटर पास जारी किया जाएगा, जिसे दिखाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने बीएमसी प्रशासन के समक्ष 'डिजिटल विजिटर पास मैनेजमेंट सिस्टम' का एक औपचारिक प्रस्ताव रखा है।
मेयर रितु तावड़े ने बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे को एक आधिकारिक पत्र लिखकर इस नीति को मुंबई के सभी नागरिक अस्पतालों में तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अपने पत्र में मेयर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, वार्डों के भीतर साफ-सफाई बनाए रखने, संक्रमण के फैलाव को रोकने और मरीजों को एक शांत व जीवाणु-मुक्त वातावरण देने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद आवश्यक हो गया है। अस्पतालों में बेकाबू होती भीड़ न केवल डॉक्टरों के काम में बाधा डालती है, बल्कि खुद मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
मेयर ने बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध किया है कि मुंबई के सबसे व्यस्त और बड़े सिविक अस्पतालों जैसे केईएम (KEM), सायन (Sion) और नायर (Nair) हॉस्पिटल में इस नई व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तत्काल शुरू किया जाए।
प्रस्तावित नीति के तहत मरीजों के पास केवल एक ही तीमारदार मौजूद रह सकेगा, जिससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को बिना किसी परेशानी और भीड़-भाड़ के अपनी ड्यूटी करने की सहूलियत मिलेगी। अस्पताल के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा आधुनिक स्कैनिंग मशीनों से डिजिटल पास की जांच की जाएगी, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति अस्पताल परिसर के संवेदनशील क्षेत्रों में न घूम सके।
मेयर रितु तावड़े ने स्पष्ट किया कि जो मरीज बेहद गंभीर स्थिति में हैं या इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती हैं, उनके परिजनों को परेशान नहीं किया जाएगा। ऐसे संवेदनशील मामलों में अस्पताल प्रशासन को मानवीय आधार पर एक से अधिक डिजिटल पास जारी करने का विशेष विवेकाधीन अधिकार होगा।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक पहल से अस्पतालों के गलियारों और वार्डों में अनावश्यक भीड़भाड़ में भारी कमी आएगी, स्वच्छता का स्तर सुधरेगा और मेडिकल स्टाफ पूरी एकाग्रता के साथ गंभीर मरीजों की देखभाल कर सकेगा, जिससे अंततः सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।