मुंबई के भोईवाड़ा में डिटेंशन सेंटर शुरू, 2500 बांग्लादेशियों की धरपकड़ के बाद बड़ा एक्शन

Bhoiwada Detention Center: मुंबई के भोईवाड़ा में डिटेंशन सेंटर शुरू। 150 की क्षमता वाले इस केंद्र में 2500 गिरफ्तार बांग्लादेशियों को निर्वासन तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था है।
Bhoiwada Detention Center
Bhoiwada Detention Center (फोटो क्रेडिट-X)
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Mumbai Police Bangladeshi Arrest: मुंबई के भोईवाड़ा इलाके में महाराष्ट्र का पहला आधिकारिक डिटेंशन सेंटर (स्थानबद्धता केंद्र) शुरू हो गया है। अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ मुंबई पुलिस की हालिया बड़ी कार्रवाई के बाद यह कदम उठाया गया है। गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य निर्वासन (Deportation) की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निगरानी में रखना है।

यह सेंटर 20 मार्च 2026 से पूरी तरह क्रियाशील हो चुका है, जिससे अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

150 लोगों की क्षमता: महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था

भोईवाड़ा स्थित इस डिटेंशन सेंटर को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। वर्तमान में इसकी क्षमता 150 लोगों को एक साथ रखने की है। मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का ध्यान रखते हुए, प्रशासन ने यहां पुरुषों के अलावा महिलाओं और बच्चों के लिए पूरी तरह से अलग और सुरक्षित ब्लॉक बनाए हैं। वर्तमान में, शुरुआती चरण में 10 से 15 बांग्लादेशी नागरिकों को यहां शिफ्ट किया गया है, जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं।

2500 गिरफ्तारियां: क्यों अनिवार्य हुआ यह केंद्र?

मुंबई पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'सघन तलाशी अभियान' के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। केवल साल 2025-26 के दौरान ही मुंबई के विभिन्न हिस्सों से 2500 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से रहते हुए पकड़ा गया है। इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित रखने की थी। सामान्य जेलों में भीड़ और कानूनी तकनीकी बाधाओं के कारण एक समर्पित डिटेंशन सेंटर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसे अब भोईवाड़ा में धरातल पर उतारा गया है।

निर्वासन प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता और गति

इस सेंटर के शुरू होने से जांच एजेंसियों और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के बीच समन्वय बेहतर होगा। अवैध रूप से रह रहे नागरिकों के दस्तावेजों का सत्यापन और उनके मूल देश के दूतावास से संपर्क कर 'ट्रैवल परमिट' प्राप्त करने की प्रक्रिया अब एक ही सुरक्षित स्थान से संचालित की जा सकेगी। गृह विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से मुंबई में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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