

BMC Construction Pollution Rules Mumbai: शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गठित हाई पावर कमेटी ने अपनी पहली समीक्षा बैठक में पश्चिमी उपनगरों के 3 वार्डों की स्थिति का आकलन किया।
बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से जुड़े सभी नियमों को सख्ती से लागू करें।
यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित परियोजनाओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस बैठक में ए, के-पूर्व और एच-पश्चिम वार्ड के अधिकारी उपस्थित थे। बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पश्चिमी उपनगरों में बड़ी संख्या में निर्माण कार्य चल रहे हैं, इसलिए समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत इन्हीं वार्डों से की गई है।
दरअसल, वायु प्रदूषण के मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कई बार बीएमसी प्रशासन को फटकार लगाई थी। इसके बाद अदालत के निर्देश पर एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया। इस समिति में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अमजद जे। सय्यद तथा बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश अनुजा प्रभुदेसाई शामिल हैं। वहीं बीएमसी के उपायुक्त अविनाश काटे को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। नरीमन प्वाइंट स्थित रहेजा चेंबर्स में आयोजित इस बैठक में तीनों वार्डों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही निर्माण परियोजनाओं का विस्तृत विवरण कमेटी को सौंपा। इसमें यह जानकारी दी गई कि कुल कितनी निर्माण साइटें हैं, किन स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन हो रहा है और जहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहां क्या कार्रवाई की गई है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार आर-मध्य वार्ड में कुल 1278 निर्माण स्थल है। इनमें 942 निजी और 336 सरकारी परियोजनाएं शामिल है। इन साइटो में से 772 स्थानों पर नियमों का पालन नहीं किए जाने के कारण बीएमसी ने कारण बताओ नोटिस और स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए हैं, अविनाश काटे ने बताया कि यह समिति की पहली आधिकारिक बैठक थी। इसमें नियमों के कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी वार्डों की इसी तरह समीक्षा की जाएगी और जहां आवश्यक होगा, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे।
गौरतलब है कि बीएमसी ने निर्माण स्थलों के लिए कुल 30 दिशा-निर्देश तय किए है, जिनका पालन करना अनिवार्य है। हालांकि कई जगह इन नियमों का पालन न होने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने यह समिति गठित की है, जो प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक सुझाव भी देगी।