

Monkeys Nuisance At MNS Chief Raj Thackeray Residence: मुंबई का दादर इलाका और खास तौर पर ऐतिहासिक शिवाजी पार्क अपनी शांति और राजनीतिक सरगर्मियों के लिए मशहूर है। लेकिन आज की सुबह यहां का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के आलीशान निवासस्थान शिवतीर्थ में कुछ ऐसे बिन बुलाए मेहमानों ने दस्तक दी, जिन्होंने सुरक्षा बलों से लेकर प्रशासन तक सबको हैरान कर दिया।
रविवार की सुबह जब लोग शिवाजी पार्क में टहल रहे थे, तभी बंदरों की एक बड़ी टोली ने इलाके में प्रवेश किया। ये बंदर इमारतों और पेड़ों पर छलांग लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। देखते ही देखते, यह टोली सीधे राज ठाकरे के आवास शिवतीर्थ तक जा पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बंदरों का यह समूह इतना निडर था कि वे ऊंची दीवारों को लांघकर सीधे बंगले की बाल्कनी तक पहुंच गए।
मामला तब गंभीर हो गया जब कुछ बंदर बाल्कनी के रास्ते घर के अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। राज ठाकरे का घर अपनी भव्यता और सुरक्षा के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रकृति के इन नटखट प्राणियों के सामने सुरक्षा के घेरे छोटे पड़ गए। करीब आधे घंटे तक बंदरों की यह फौज शिवतीर्थ के आसपास और उसकी बाल्कनी में उत्पात मचाती रही, जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों में खलबली मच गई।
बंदरों के घर में घुसने की आशंका को देखते हुए तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई। मामला राज ठाकरे के निवास से जुड़ा था, इसलिए पुलिस प्रशासन ने बिना देरी किए स्थिति को संभाला और साथ ही अग्निशमन दल को भी मदद के लिए बुलाया गया। कुछ ही देर में पुलिस की गाड़ियां और दमकल विभाग के जवान शिवतीर्थ पहुंच गए।
अग्निशमन दल और पुलिस के जवानों ने मिलकर बंदरों को पकड़ने और वहां से सुरक्षित हटाने का अभियान शुरू किया । पेड़ों और बालकनियों के बीच बंदरों की उछल-कूद और उन्हें काबू करने की जवानों की कोशिशों को देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। जवानों के लिए चुनौती यह थी कि बंदरों को बिना चोट पहुंचाए वहां से हटाना था।
राज ठाकरे के निवास पर हुई इस वानर सेना की घुसपैठ ने रविवार की छुट्टी के दिन दादर पुलिस और फायर ब्रिगेड को काफी मशक्कत करने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, इस पूरी घटना में किसी के घायल होने या संपत्ति के बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन शिवतीर्थ की बाल्कनी में बंदरों की इस मौजूदगी ने पूरे मुंबई में चर्चा छेड़ दी है। अब प्रशासन शिवाजी पार्क के पेड़ों पर रहने वाले इन जीवों के प्रबंधन पर भी विचार कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।