Thane News: मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में परिवारवाद हावी, पति-पत्नी साथ मैदान में

Maharashtra Local Body Election: मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में परिवारवाद खुलकर सामने आया है। पति-पत्नी और मां-बेटे उम्मीदवार बने हैं, वहीं 8 पूर्व पार्षद आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं।
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मीरा-भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mira Bhayandar News In Hindi: मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में एक ही परिवार से कई उम्मीदवार उतारने की परंपरा इस बार और अधिक स्पष्ट रूप में सामने आई है। स्थिति यह है कि कहीं पति-पत्नी चुनावी अखाड़े में साथ हैं, तो कहीं मां और बेटा एक साथ मैदान में उतरे हैं।

इस चुनाव में कुल 4 पति-पत्नी जोड़ियां उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। नवघर क्षेत्र से प्रभाग 11 में शिवसेना की पूर्व पार्षद वंदना पाटिल के साथ उनके पति विकास पाटिल ने भी नामांकन दाखिल किया है। इसी तरह शिवसेना के जिला प्रमुख एवं पूर्व पार्षद राजू भोइर भी अपनी पत्नी भावना भोईर के साथ प्रभाग 16 से चुनावी मैदान में हैं।

परिवारवाद की राजनीति का एक और उदाहरण तब सामने आया, जब पूर्व नगरसेविका तारा घरत और उनके बेटे पवन घरत, दोनों को शिवसेना ने प्रभाग 10 से उम्मीदवार बनाया है। मां-बेटे की यह जोड़ी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

8 पूर्व नगरसेवकों में होगा महासंग्राम

चुनाव की दिलचस्प बात यह है कि 8 पूर्व पार्षद आमने-सामने चुनाव लह रहे हैं, ऐसे में तय माना जा रहा है कि इनमें से कम से कम 4 पूर्व पार्षदों की हार का सामना करना पड़ेगा भाईंदर पूर्व के प्रभाग क्रमांक 3 में भाजपा के गणेषा शेट्टी और शिवसेना के दिनेश नलवाडे आमने-सामने है।

पैनकरपाड़ा के प्रभाग 15 में भाजपा के मोहन म्हात्रे और शिवसेना के कमलेश भोईर वो बीच सीधा मुकाबला है। प्रभाग 16 में भाजपा की अनीता पाटिल और शिवसेना के परशुराम म्हात्रे एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। इसके अलावा भाजपा की चंदना भावसार और शिवसेना की भावना भोइर भी आमने-सामने चुनाव लड़ रही हैं।

सबसे अनोखा मामला भाईंदर पूर्व गोडदेव और आसपास के प्रभागों में देखने को मिला है। यहां एक ही परिवार के पति-पत्नी को 2 अलग-अलग पॉर्टियों से टिकट मिला है। प्रभाग 10 से अस्तिक म्हात्रे को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने उम्मीदवार बनाया है, जबकि उनकी पत्नी ममता म्हात्रे की प्रभाग 11 से शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने मैदान में उतारा है।

कुल मिलाकर मीरा-भाईंदर का यह चुनाव परिवार, पाटी और पूर्व पार्षदों की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। मतदाता इस चुनाव में क्या भूमिका तय करते हैं, यह तो चुनाव बाद 16 जनवरी को ही पता चलेगा।

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