दक्षिण मुंबई की 12 हजार पुरानी इमारतों की म्हाडा कराएगा स्ट्रक्चरल जांच, 50 करोड़ होंगे खर्च

Mumbai Old Buildings Survey: दक्षिण मुंबई की 12 हजार से अधिक उपकर प्राप्त इमारतों के पुनर्विकास और मरम्मत के लिए म्हाडा 50 करोड़ रुपये की लागत से स्ट्रक्चरल जांच करा रहा है।
12,000 dilapidated buildings in South Mumbai to be inspected; MHADA to spend  50 crore.
इमारतों के पुनर्विकाससोर्स- सोशल मीडिया
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Mumbai Old Buildings Structural Audit: दक्षिण मुंबई की जर्जर और संभावित रूप से खतरनाक इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ करने के लिए म्हाडा ने बड़ा कदम उठाया है। मुंबई इमारत मरम्मत व पुनर्रचना मंडल अब 12 हजार से अधिक उपकर प्राप्त इमारतों की संरचनात्मक जांच करेगा। इसके लिए करीब 50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पहले चरण में 750 इमारतों की जांच सोमवार से शुरू हो गई है। जांच में अति खतरनाक पाई जाने वाली इमारतों पर 79 (अ) या अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी, जबकि दुरुस्ती योग्य इमारतों की तत्काल मरम्मत की जाएगी।

दक्षिण मुंबई में कई हजार ऐसी इमारतें हैं, जिनके पुनर्विकास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। पुनर्विकास प्रक्रिया को गति देने के लिए कुछ वर्ष पहले नई नीति लागू की गई थी। हालांकि, नीति की 79 (अ) के प्रावधान से जुड़ा मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है। राज्य सरकार ने हाल ही में म्हाडा को सक्षम प्राधिकरण का दर्जा देने वाला विधेयक मंजूर किया है।

दोबारा शुरू की गई जांच

इससे पुनर्विकास से जुड़े न्यायालयीन मामलों का रास्ता आसान होने और प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। इस बीच, 79 (अ) पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा है। इसी दौरान अति खतरनाक इमारतों की पहचान कर रखने का निर्णय मंडल ने लिया है, ताकि फैसला आने के बाद तत्काल कार्रवाई की जा सके।

मंडल के निवासी कार्यकारी अभियंता रुपेश राऊत के अनुसार जनवरी में भी संरचनात्मक जांच शुरू की गई थी, लेकिन विरोध और अन्य कारणों से काम जल्द ही बंद हो गया। तब केवल 900 से 1,000 इमारतों की जांच हो सकी थी। अब चार निजी कंपनियों की नियुक्ति कर जांच दोबारा शुरू की गई है।

12,000 dilapidated buildings in South Mumbai to be inspected; MHADA to spend  50 crore.
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वर्ष 2027 तक जांच पूरा करने का लक्ष्य

पहले चरण में प्रत्येक विभाग की 50 इमारतों के हिसाब से 750 इमारतों की जांच की जा रही है। सभी 12 हजार से अधिक इमारतों की जांच अगस्त 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य है। रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत या पुनर्विकास की कार्रवाई होगी।

इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। म्हाडा के अनुसार इससे अति खतरनाक इमारतों की समय रहते पहचान कर दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

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