Mumbai BMC Social Media Spending Row: मुंबई की महापौर रितु तावड़े के एक पत्र ने बीएमसी में महापौर कार्यालय से जुड़े प्रस्तावों की जवाबदेही को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। 19 अगस्त को बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को लिखे पत्र में तावड़े ने सभी विभागों को निर्देश देने की मांग की है कि प्रशासनिक प्रस्तावों में बिना जरूरत महापौर, महापौर कार्यालय या महापौर के आधिकारिक आवास का उल्लेख न किया जाए, लेकिन इस पत्र का समय सवालों के घेरे में है।
यह पत्र उस प्रस्ताव की खबर सामने आने के एक दिन बाद आया है, जिसमें महापौर कार्यालय के सोशल मीडिया प्रबंधन पर 25.12 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान है। यानी महापौर पहले काम करती है और जब हंगामा होता है तो मीडिया से संवाद कर अपने आप को दूर कर लेती हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया टीम पर 25 लाख रुपये सालाना खर्च करने के मामले में महापौर अपने आप को घिरता देख उन्होंने बीएमसी आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि बीएमसी की विभिन्न समितियों, स्थायी समिति और महासभा के समक्ष रखे जाने वाले कई प्रस्तावों में महापौर का उल्लेख किया जाता है, जबकि ऐसे प्रस्ताव तैयार करने में उनकी ओर से कोई निर्देश नहीं दिए जाते।
इससे जनता के बीच यह धारणा बनती है कि महापौर उन फैसलों से जुड़ी हैं, जिनकी प्रक्रिया वास्तव में प्रशासनिक स्तर पर शुरू होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादों का असर महापौर पद की संस्था के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत छवि पर भी पड़ता है।
हालांकि, सोशल मीडिया प्रस्ताव को लेकर उपलब्ध दस्तावेज इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, 20 फरवरी 2026 को पद संभालने के कुछ समय बाद ही तावड़े ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर महापौर कार्यालय के लिए तीन समर्पित कर्मचारियों की मांग की थी।
इनमें सोशल मीडिया विशेषज्ञ, फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर शामिल थे। पत्र में मेयर के निरीक्षण, दौरे, उद्घाटन, बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की जानकारी नागरिकों
तक पहुंचाने के लिए इन कर्मचारियों की जरूरत बताई गई थी।
इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर यह मांग आगे बढ़ी और अंततः सोशल मीडिया प्रबंधन तथा प्रचार-प्रसार के लिए 25।12 लाख रुपये के प्रस्ताव का रूप ले लिया। इसमें निजी एजेंसी को एक वर्ष के लिए नियुक्त कर मेयर की आधिकारिक गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, कटेंट तैयार करने और सोशल मीडिया पर प्रसार की जिम्मेदारी देने का प्रावधान है। विपक्ष ने इसी बिंदु को मुद्दा बनाया है।