

Manoj Jarange Patil ProtestUltimatum: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बेहद गरमा गया है। प्रमुख मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) ने राज्य सरकार के खिलाफ सीधे तौर पर आर-पार के अंतिम संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
जरांगे पाटिल ने सरकार को 28 अगस्त 2026 तक की अंतिम समय सीमा (अल्टीमेटम) देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 29 अगस्त 2026 से राज्यव्यापी ऐतिहासिक और निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस बार "या तो मैं रहूंगा, या फिर सरकार रहेगी।"
मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि हैदराबाद, सतारा और कोल्हापुर गैजेटियर के ऐतिहासिक दस्तावेजों को आधार मानकर राज्य के 58 लाख मराठा समुदाय के लोगों को तुरंत कुनबी जाति प्रमाणपत्र (Kunbi Certificate) जारी किए जाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार तारीखें देकर मराठा समाज के साथ वादाखिलाफी कर रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 29 अगस्त से शुरू होने वाला आंदोलन मराठा समुदाय के अधिकारों के लिए अंतिम लड़ाई होगा।
मनोज जरांगे पाटिल के इस तीखे अल्टीमेटम के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार मराठा समाज को आरक्षण देने और उनकी मांगों का समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बहुत कम और तकनीकी मामले ही लंबित बचे हैं। सरकार किसी भी वास्तविक और जायज मुद्दे पर जरांगे पाटिल और मराठा प्रतिनिधियों से बातचीत करने के लिए तैयार है।
जरांगे पाटिल के इस अल्टीमेटम के बाद महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आगामी चुनावों और रणनीतिक परिस्थितियों के बीच मराठा समाज का यह रुख सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। आंदोलन की घोषणा के बाद से ही राज्यभर में मराठा समुदाय के लोग 29 अगस्त की तैयारी में जुटने लगे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा होगी।