

बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच तनातनी चरम पर पहुंची।
निजी स्कूलों की मान्यता और CBSE/IB बोर्ड्स की NOC देने की पावर मंत्री से छीनी।
सरकार ने इसे ई-गवर्नेंस और तेजी से काम करने का हवाला दिया।
CM फडणवीस के एक्शन से शिंदे गुट में भारी नाराजगी।
Maharashtra Education Minister Powers Withdraws: महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच दूरियां काफी बढ़ गई हैं। बीजेपी ने चुनाव में मिली हार के लिए शिंदे गुट की कार्यशैली और और असहयोग को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन यह विवाद यहीं थमता नजर नहीं आ रहा; इस राजनीतिक तनातनी के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक ऐसा प्रशासनिक फैसला लिया है, जिसने सत्ता के गलियारों में सनसनी फैला दी है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने शिंदे खेमे से आने वाले स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भूसे के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार छीन लिए हैं। अब तक निजी और स्व-वित्तपोषित स्कूलों की मान्यता, उनके अपग्रेडेशन और नए डिवीजन शुरू करने की अंतिम फाइलें मंत्री के टेबल पर फाइनल होती थीं। हालांकि, हाल ही में जारी एक सरकारी सर्कुलर के बाद इन सभी शक्तियों पर से मंत्री का नियंत्रण हटा दिया गया है।
अब राज्य में स्व-वित्तपोषित स्कूलों के अपग्रेडेशन के लिए 'लेटर ऑफ इंटेंट' जारी करने और मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों को अंतिम मान्यता पत्र देने का सर्वाधिकार प्रमुख सचिव (स्कूल शिक्षा) के पास स्थानांतरित कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, मुंबई, ठाणे, पुणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड़, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर जैसे बड़े औद्योगिक व शैक्षणिक शहरों में सीबीएसई स्कूलों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने की पावर भी सचिव स्तर पर सीमित कर दी गई है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में CBSE, CISCE, IB, IGCSE और CIE जैसे अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय बोर्ड के स्कूलों की NOC रिन्यू करने और नई डिवीजन जोड़ने की अनुमति अब सीधे शिक्षा आयुक्त देंगे।
हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यह फैसला प्रशासनिक फाइलों के निपटारे में तेजी लाने और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला शिंदे गुट को सीधा संदेश देने और गठबंधन में अपने वर्चस्व को स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है।
यह पहली बार नहीं है जब शिंदे गुट के मंत्रियों के पंख काटे गए हैं। इससे पहले भी फडणवीस सरकार द्वारा ऐसे कई कड़े फैसले लिए जा चुके हैं। इससे पहले शिवसेना खेमे के मंत्री प्रताप सरनाईक के विभाग की महत्वपूर्ण नीतियों, फाइलों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का नियंत्रण स्थापित किया गया। साथ ही, मराठी भाषा के अनिवार्य उपयोग से जुड़ा इनका एक फैसला खुद सीएम ने पलट दिया था।
मंत्री संजय राठौड़, गुलाबराव पाटिल, उदय सामंत, शंभुराज देसाई के पसंदीदा निजी सहायकों (PA) और विशेष कार्याधिकारियों (OSD) की नियुक्तियों को निरस्त कर उन्हें पद से हटा दिया गया था। इन ताबड़तोड़ प्रशासनिक बदलावों के बाद महायुति के दोनों घटकों के बीच अविश्वास की खाई और चौड़ी होने के आसार बन गए हैं।