जिला परिषद चुनाव का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें, बदल सकता है आरक्षण समीकरण

Maharashtra ZP Election: महाराष्ट्र जेडपी चुनाव का रास्ता साफ हो सकता है। 50% आरक्षण सीमा से नागपुर समेत कई जिलों का गणित बदलेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हैं।
Maharashtra ZP elections may get green light soon. 50% reservation cap will alter political math in Nagpur and other districts. All eyes on Supreme Court verdict.
सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित जिला परिषद (जेडपी) चुनावों का रास्ता जल्द साफ हो सकता है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव कराने की तैयारी जताई है, जिसके बाद संभावना है कि दिसंबर 2026 में जिला परिषद चुनाव कराए जाएं। हालांकि, यदि चुनाव 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के तहत कराए जाते हैं, तो कई जिलों में आरक्षण का पूरा गणित बदल सकता है।

नागपुर जिला परिषद में सबसे बड़ा असर संभव

50 प्रतिशत आरक्षण सीमा लागू होने का सबसे अधिक प्रभाव नागपुर जिला परिषद पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान आरक्षण प्रारूप के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने 57 सीटों में से 33 सीटें आरक्षित की हैं। इनमें 15 सीटें ओबीसी, 10 अनुसूचित जाति (एससी) और 8 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनाव कराने के पक्ष में सकारात्मक रुख अपनाने के बाद लंबे समय से लंबित स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनावों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी राजनीतिक दलों, संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे जिला परिषद चुनावों की दिशा और समय-सीमा तय होगी।

ओबीसी आरक्षण की सीटें घट सकती

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यदि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत तक सीमित रखा जाता है, तो 57 में से केवल 27 सीटें ही आरक्षित रखी जा सकेंगी।
  • ऐसे में वर्तमान की 33 आरक्षित सीटों की संख्या घटकर 27 रह सकती है।
  • इसका सबसे अधिक असर ओबीसी आरक्षण पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
  • फिलहाल ओबीसी के लिए आरक्षित 15 सीटें घटकर 10 रह सकती हैं।
  • इससे नागपुर जिला परिषद सहित अन्य जिलों के राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।
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