निकाय चुनाव का साइड इफेक्ट…शीतकालीन सत्र पर बढ़ा संशय, जानें नया अपडेट
Nagpur Assembly Session: महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 8 दिसंबर से प्रस्तावित, लेकिन निकाय चुनावों की घोषणा के कारण टलने की संभावना, सरकार दो दिवसीय विशेष सत्र बुला सकती है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
निकाय चुनाव का साइड इफेक्ट...शीतकालीन सत्र पर बढ़ा संशय, जानें नया अपडेट
Maharashtra News: महाराष्ट्र विधानमंडल का नागपुर में होनेवाला शीतकालीन सत्र 8 दिसंबर से प्रस्तावित है. प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां चल रही हैं लेकिन राज्य की स्थानीय निकायों के चुनाव की पृष्ठभूमि में सत्र आयोजन पर संशय के बादल भी मंडरा रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि नवंबर 2025 के दूसरे सप्ताह में चुनाव आयोग राज्य में निकाय चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है. ऐसे में शीत कालीन अधिवेशन को टालना पड़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों (इनमें 29 नगर निगम, 248 नगर परिषद, 42 नगर पंचायत, 32 जिला परिषद और 336 पंचायत समितियों) के चुनाव 31 जनवरी 2026 से पहले संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं. तदनुसार, चुनाव आयोग तैयारियों में जोर शोर से जुटा है.
ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि दिसंबर महीने में नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव करा सकता है. इसके लिए नवंबर महीने में आचार संहिता की घोषणा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. यदि ऐसा होता है तो शीतकालीन सत्र टालना पड़ जाएगा.
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दो दिवसीय विशेष सत्र की अटकलें
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मिली बंपर जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद हैं. उसी प्रदर्शन को बीजेपी और उसका शीर्ष नेतृत्व निकाय चुनावों में भी दोहराना चाहता है. सोमवार को मुंबई दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में पार्टी के महाराष्ट्र नेतृत्व से कह दिया था कि भले ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली है और केंद्र तथा राज्य में बीजेपी की सरकार है लेकिन इस डबल इंजन से वह संतुष्ट नहीं हैं.
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वह ट्रिपल इंजन चाहते हैं. अर्थात स्थानीय निकायों पर भी बीजेपी का कब्जा होना चाहिए. इसलिए अंदरखाने ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही है कि आचार संहिता लागू होने की संभावनाओं के बीच सरकार मुंबई में दो दिवसीय विशेष सत्र बुला सकती है. जिसमें निकाय चुनावों को देखते हुए कुछ बड़ी घोषणा की जा सकती है.
