बंगाल और बिहार के बाद अब महाराष्ट्र में 'SIR' की तैयारी; एकनाथ शिंदे की सेना ने बूथ स्तर पर शुरू किया काम

Maharashtra SIR News: एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची संशोधन (SIR) अभियान शुरू किया। बूथ स्तर पर संदिग्ध नाम हटाने की तैयारी।
Maharashtra Voter List SIR Revision
Maharashtra Voter List SIR Revision (डिजाइन फोटो)
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Maharashtra Voter List SIR Revision: पश्चिम बंगाल और बिहार में मतदाता सूचियों (Voter Lists) में हुए बड़े पैमाने पर संशोधन के बाद, अब इसकी गूंज महाराष्ट्र में भी सुनाई देने लगी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में एसआईआर (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर अपनी कमर कस ली है।

जहाँ विपक्ष अभी इस हलचल से बेखबर दिख रहा है, वहीं सत्ताधारी गठबंधन ने बूथ स्तर पर अपनी पैठ मजबूत करने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी तैयारी शुरू कर दी है।

क्या है SIR और क्यों मचा है बवाल?

केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा संचालित एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, अपात्र और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज संदिग्ध मतदाताओं के नाम हटाना है। हालांकि, बिहार और बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान लाखों नाम काटे जाने के बाद विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है, जहाँ विपक्ष का दावा है कि सत्ता के लिए 'असुविधाजनक' मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

शिंदे सेना की 'बूथवार' रणनीति

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस अभियान को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार से जोड़ दिया है। शिवसेना के पार्टी सचिव भाऊसाहेब चौधरी ने हाल ही में नासिक में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें कार्यकर्ताओं को 'एसआईआर' अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आदेश दिया गया।

निर्देश: हर लोकसभा क्षेत्र में बूथवार सूची तैयार कर केंद्रीय कार्यालय में जमा करनी होगी।

अनुशासन: संगठन में अच्छा काम करने वाले और इस अभियान को सफल बनाने वाले कार्यकर्ताओं को ही भविष्य में पार्टी में प्राथमिकता और चुनावी टिकट मिलने के संकेत दिए गए हैं।

विपक्ष की चुप्पी और भविष्य का संकट

महाराष्ट्र में फिलहाल चुनाव नहीं हैं, लेकिन मतदाता सूचियों में सुधार की यह प्रक्रिया आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की दिशा तय करेगी। सत्तापक्ष का मानना है कि पारदर्शी चुनाव के लिए फर्जी नामों का हटना जरूरी है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्ष समय रहते सतर्क नहीं हुआ, तो आने वाले समय में एक नया बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है।

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