महाराष्ट्र के लाखों गिग वर्कर्स की चमकेगी किस्मत! सपा MLA रईस शेख ने विधानसभा में पेश किया प्राइवेट मेंबर बिल

SP MLA Rais Shaikh Private Member Bill: सपा विधायक रईस शेख ने महाराष्ट्र विधानसभा में 'गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स बिल 2026' पेश किया है। इसका लाभ डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवरों को मिलेगा।
SP MLA Rais Shaikh
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Maharashtra Gig And Platform Workers (Rights and Protection) Bill: महाराष्ट्र के लाखों गिग वर्कर्स जैसे कि ज़ोमैटो, स्विगी के डिलीवरी पार्टनर और ओला-उबर के ड्राइवर के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने महाराष्ट्र विधानसभा में एक 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश किया है, जिसे "महाराष्ट्र गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (अधिकार और संरक्षण) विधेयक, 2026" नाम दिया गया है। इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य इन श्रमिकों को उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शोषणकारी प्रथाओं से कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।

क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में, महाराष्ट्र में डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों ने बार-बार हड़तालें और विरोध प्रदर्शन किए हैं। रईस शेख के अनुसार, ये श्रमिक असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, सामाजिक सुरक्षा की कमी, 'एल्गोरिथमिक शोषण' और प्लेटफार्मों द्वारा लगाए गए मनमाने दंड से जूझ रहे हैं। मौजूदा श्रम कानून, जिसमें 2020 का 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' भी शामिल है, राज्य स्तर पर प्रवर्तन, वेतन सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसी चुनौतियों का समाधान करने में विफल रहे हैं। इसी कमी को पूरा करने के लिए इस नए राज्य स्तरीय ढांचे की मांग की गई है।

बिल से क्या होंगे बदलाव

प्रस्तावित कानून में एक नियामक बोर्ड (Regulatory Board) के गठन का सुझाव दिया गया है, जो श्रमिकों के कल्याण की निगरानी करेगा। इसके तहत डिजिटल प्लेटफार्मों के लिए सख्त अनुपालन नियम तय किए जाएंगे ताकि श्रमिकों को उनका हक मिल सके। यह बिल न केवल उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाएगा, बल्कि एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए 'एल्गोरिथमिक पारदर्शिता' की भी मांग करता है।

क्या कहते है आंकड़ें?

जनवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर देश भर में केवल 10.5 लाख प्लेटफॉर्म श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें महाराष्ट्र 1,34,705 श्रमिकों के साथ देश में सबसे आगे है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार का नंबर आता है। हालांकि, रईस शेख का मानना है कि ये आंकड़े वास्तविक संख्या की तुलना में बहुत कम हैं। 2022 की नीति आयोग की रिपोर्ट में भारत के गिग वर्कफोर्स का अनुमान 2020-21 में 77 लाख बताया गया था, जिसके 2029-30 तक बढ़कर 2.35 करोड़ होने की उम्मीद है।

यह बिल महाराष्ट्र के गिग वर्कफोर्स के लिए एक निष्पक्ष और सुरक्षित डिजिटल कार्य वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह कानून पारित होता है, तो महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जो अपने डिजिटल श्रमिकों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देते हैं।

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