महाराष्ट्र में बड़ा फैसला: 2011 से पहले की झुग्गियों को संरक्षण, फनल जोन इमारतों का होगा पुनर्विकास

Maharashtra Slum Legal Protection: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, 1 जनवरी 2011 से पहले बनी झुग्गियों को मिलेगा पूर्ण संरक्षण। हवाई अड्डा फनल जोन की पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ।
Maharashtra Government protects slums built before Jan 2011 and eases redevelopment norms for Mumbai airport's funnel zone and Juhu military area buildings.
झुग्गी-झोपड़ियों (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Government Legal Protection To Slums: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य के गरीब और मध्यम वर्ग के हित में दो बेहद ऐतिहासिक निर्णय गुरुवार को लिए हैं। सरकार ने राज्य में 1 जनवरी 2011 से पहले बनी सभी झुग्गियों (झोपड़पट्टियों) को पूर्ण संरक्षण देने का निर्णय लिया है। इससे झुग्गियों में रहने वाले लाखों परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की उम्मीदें बढ़ गई है।

इसके साथ ही सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के फनल जोन और जुहू मिलिट्री ट्रांसमीटर स्टेशन के प्रतिबंधों से प्रभावित पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को भी तेज रफ्तार देने का निर्णय लिया है। इससे मुंबई सहित पूरे एमएमआर (एमएमआर) क्षेत्र का कायाकल्प होने का रास्ता साफ हो गया है।

महायुति सरकार का फैसला

विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा की है कि सरकारी, वन, सिडको के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न प्राधिकरणों की जमीनों पर 1 जनवरी 2011 से पहले बनी सभी झुग्गियों को सरकार पूरा संरक्षण देगी। इन सभी पात्र निवासियों का 'एसआरए', 'म्हाडा' या अन्य सरकारी आवास योजनाओं के माध्यम से उचित पुनर्वास किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मंजूरी के बाद इन दोनों बड़े फैसलों पर राज्य भर में युद्ध स्तर पर अमल शुरू कर दिया गया है।

सदन में जनप्रतिनिधियों की मांग पर संज्ञान लेते हुए राजस्व मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी संबंधित जमीनों पर रहने वाले नागरिकों का बायोमेट्रिक और प्रत्यक्ष सर्वेक्षण (सर्वे) पूरा कर लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समय सीमा के भीतर एक भी पात्र नागरिक को बेघर नहीं होने दिया जाएगा।

विशेष उच्च स्तरीय समिति का किया गठन

मुंबई उपनगर और कोंकण संभाग में मैंग्रोव (कांदलवन), वन भूमि, राजस्व, नजूल और सिडको की जमीनों पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बनी हुई हैं। विकास योजना के नियमों, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों या वन विभाग के कड़े कानूनों के कारण कई जगहों पर इन झुग्गियों को उसी स्थान पर नियमित करना

संभव नहीं है।

इस गंभीर तकनीकी समस्या का स्थायी हल खोजने के लिए कोंकण विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में मुंबई और मुंबई उपनगर के दोनों जिलाधिकारियों को शामिल किया गया है और उनके माध्यम से सर्वे का काम शुरू किया गया है।

तीन महीने में बनेगा पुनर्वास का मास्टर प्लान

जिन स्थानों पर पर्यावरण या अन्य तकनीकी कारणों से घरों को उसी जगह नियमित नहीं किया जा सकता, वहां के निवासियों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाएगा। इसके लिए म्हाडा, सिडको और एसआरए की आवास परियोजनाओं में इन नागरिकों को कहां और कैसे समायोजित किया जा सकता है, इसका एक विस्तृत मास्टर प्लान अगले 3 महीनों में तैयार किया जाएगा। नगर विकास विभाग इन सभी एजेंसियों के कामकाज का नियमन और नियंत्रण करेगा ताकि पुनर्वास की प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।

फडणवीस ने कैबिनेट बैठक में इस नीति को दी मंजूरी

झुग्गियों के संरक्षण के साथ ही महायुति सरकार ने मुंबई के हवाई अड्डा फनल जोन (सांताकुज, विले पार्ले, कुर्ला) और जुहू मिलिट्री ट्रांसमीटर स्टेशन के प्रतिबंधों से प्रभावित पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को भी तेज करने के निर्देश दिए है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को इन सभी प्रभावित इमारतों की 'मैपिंग' करने को कहा है। प्रभावित इमारतों के पुनर्विकास को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए सड़क की चौड़ाई के अनुसार उच्च चटई निर्देशांक (एफएसआई) देने और निर्माण कार्य के एकत्रीकरण (क्लविंग) को मंजूरी दी गई है।

एमएमआर क्षेत्र को मिलेगा अभूतपूर्व लाभ

  • महापालिका यह तय करेगी कि इस अतिरिक्त एफएसआई का उपयोग पास के निर्माण कार्यों में कैसे किया जाए। महायुति सरकार के इन जुड़वां फैसलों से मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को बहुत बड़ा लाभ होगा।
  • मुंबई और उपनगरों में वन भूमि और सिडको के भूखंडों पर फैली झुग्गियों का विकास लंबे समय से अटका हुआ था, जो अब सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा। इससे कीमती जमीनें भी मुक्त होगी और गरीबों को सुरक्षित व पक्के मकान मिलेंगे।
  • दूसरी ओर, फनल जोन और मिलिट्री प्रतिबंधों के कारण दशकों से जर्जर हालत में पड़ी पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होने से एमएमआर क्षेत्र में आधुनिक, सुरक्षित और सुनियोजित शहरी विकास को नई गति मिलेगी।।
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