

महाराष्ट्र में टैक्स चोरी पर RTO की कार्रवाई, 675 गाड़ियां पकड़ी गईं।
12 गाड़ियां जब्त, ₹24.09 लाख की वसूली।
मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में अभियान जारी रहेगा।
Maharashtra Luxury Car Tax Evasion: महाराष्ट्र में टैक्स बचाने के लिए दूसरे राज्यों का नंबर लगाकर गाड़ी दौड़ाने वाले रईसों पर आरटीओ का हंटर चल रहा है। परिवहन विभाग की इस सख्त कार्रवाई की गाज बाहरी राज्यों के नंबर वाली 675 गाड़ियों पर गिरी है।
मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में 5 से 17 अक्टूबर तक चले विशेष अभियान में विभाग ने कुल 6,408 गाड़ियों की जांच की और नियम तोड़ने वालों से 24।09 लाख रुपए की वसूली की। जांच में सबसे ज्यादा महंगी लग्जरी और स्पोर्ट्स कारें पकड़ में आईं, जिनमें से 12 गाड़ियों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया।
दरअसल, मामला टैक्स बचाने के जुगाड़ का है। महाराष्ट्र में गाड़ियों पर टैक्स ज्यादा है। इसलिए कई अमीर लोग अपनी करोड़ों की गाड़ियां दादरा नगर हवेली, दमन-दीव जैसे कम टैक्स वाले राज्यों में रजिस्टर करा लेते हैं, जबकि गाड़ी चलती रोज मुंबई-पुणे की सड़कों पर ही है।
इसी शिकायत पर आरटीओ के फ्लाइंग स्क्वॉड ने सड़कों पर उतरकर महंगी गाड़ियों वाले इलाकों में नाकाबंदी की। कागजात और मालिकों के असली पते की जांच में यह खेल सामने आ गया।
जो रईस यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी गाड़ी सच में बाहर के राज्य में चलती है, उन्हें महाराष्ट्र राज्य का बकाया टैक्स भरने का चालान थमा दिया गया। कई ने तुरंत पैसा भर दिया, जो नहीं भरे उनकी लग्जरी गाड़ियां जब्त कर ली गईं। विभाग की नजर में ऐसी
कई महंगी कारों के साथ-साथ क्रेन और ट्रकों जैसे कमर्शियल वाहन भी आए। जांच में यह भी सामने आया कि महाराष्ट्र के ही 9 आरटीओ से बड़ी संख्या में टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन लेकर गाड़ियों को बाहर रजिस्टर कराया जा रहा था।
कब चला अभियान 5 से 17 अक्टूबर
कहां चला : मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़
कितनी गाडिया जांची: 6,408
नियम तोड़ने वाली मिली: 675
जब्त की गईं 12 गाड़ियां
कुल वसूली: 24,09,178 रुपए
विभाग ने उन हॉटस्पॉट पर टीमों को तैनात किया जहां महंगी गाड़ियां ज्यादा दिखती है। गाड़ियों को रोककर उनके रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और मालिक के असली पते के सबूत मांगे गए।
जो मालिक यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी गाड़ी सच में बाहर के राज्य में इस्तेमाल होती है, उन्हें महाराष्ट्र का बकाया टैक्स भरने का नोटिस दिया गया। विभाग ने साफ कहा है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अगर गाडी महाराष्ट्र में परमानेंट चल रही है, तो चाहे नंबर कहीं का भी हो, टैक्स महाराष्ट्र को ही देना होगा।
परिवहन विभाग ने संकेत दिया है कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत वाहनों की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों के अनुसार, किसी वाहन पर महाराष्ट्र में कर देय है या नहीं, यह उसके पंजीकरण, राज्य में उपयोग और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
इस कार्रवाई के जरिए विभाग का उद्देश्य वाहन कर से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और कथित टैक्स चोरी पर रोक लगाना है।