Maharashtra MLC Election नामांकन में दिखे राजनीतिक दलों के तेवर, किसी भी दल ने नहीं ली रिस्क

Maharashtra MLC Election में आखिरी दिन नामांकन के साथ सियासी तस्वीर साफ हो गई। 9 सीटों पर 9 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे चुनाव निर्विरोध होने की संभावना बढ़ गई है।
Maharashtra MLC Election Unopposed 9 Seats
महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव निर्विरोध सीटें (सौ. सोशल मीडिया एक्स )
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Maharashtra MLC Election Unopposed 9 Seats: महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों में टिकट पाने को लेकर मची होड़ पर आखिरकार नामांकन भरने के आखिरी दिन विराम लग गया।

किसी भी पार्टी ने जोखिम नहीं उठाया और चुनाव निर्विरोध होने की दिशा में बढ़ गया। आखिरी समय में कांग्रेस के तेवर भी ढीले पड़ गए और वह शिवसेना (ठाकरे गुट) के अंबादास दानवे को समर्थन देने इस शर्त पर राजी हो गई कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार होगा।

नामांकन के आखिरी दिन 9 सीटों के लिए सत्ता पक्ष महायुति और विपक्षी दल महाविकास आघाड़ी की ओर से 9 प्रत्याशियों ने विधान भवन में पर्चा दाखिल किया। महायुति में बीजेपी ने अपने संख्या बल के हिसाब से 5 उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सुनील कर्जतकर, माधवी नाईक, संजय भेंडे, विवेक कोल्हे और प्रमोद जठार ने अपना नामांकन दाखिल किया जबकि उपचुनाव के लिए कांग्रेस छोडकर बीजेपी में शामिल हुई प्रज्ञा सातव ने अपना पर्चा दाखिल किया, विपक्षी दल मविआ की ओर से उपचुनाव के लिए किसी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया।

शिंदे की शरण में कडू

MLA बनने छोड़ी अपनी पार्टी प्रहार संगठन के मुखिया बच्चू कडू उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शरण में चले गए, विधायक बनने के लिए उन्होंने अपनी पार्टी प्रहार छोड़कर धनुष बाण हाथ में ले लिया। शिंदे सेना में शामिल होने के बाद भी उनका एजेंडा नहीं बदलेगा। शिंदे ने नीलम गोरहे को फिर से विप भेजा। गोरहे और शीतल म्हात्रे में खींचतान चल रही थी। टिकट न मिलने से शीतल नाराज बताई जा रही हैं।

जीशान की लॉटरी परांजपे नाराज

राकां (अजित गुट) ने पूर्व राज्य मंत्री दिवंगत बाबा सिद्दीकी के बेटे व पूर्व विधायक जीशान सिद्दीकी को मौका दिया। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे व पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने अपना नामांकन पत्र भरा। पार्टी नेता आनंद परांजपे भी यह चुनाव लड़ना चाहते थे। चर्चा है कि टिकट न मिलने से वे नाराज चल रहे हैं। पार्टी में 70 से 75 नेता चुनाव लड़ने के इच्छुक थे।

मविआ में थी खींचतान

मविआ में पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की उम्मीदवारी को लेकर खीचतान चल रही थी। कांग्रेस ने दावा किया था कि यदि उद्धव चुनाव नहीं लड़ेंगे तो पार्टी अपना प्रत्याशी उत्तारेगी। उद्धव के इनकार के बाद ठाकरे गुट ने कांग्रेस से बिना चर्चा किए दानवे की उम्मीदवारी घोषित कर दी। गुरुवार को ठाकरे गुट का एक प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मिलने पहुंचा।

आखिरकार मान-मनौव्वल के बाद कांग्रेस इस शर्त पर दानवे को समर्थन देने पर राजी हुई कि आगामी रास चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार होगा, सपकाल ने कहा कि हम मविआ के रूप में एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ लड़ेंगे।

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