

विधान परिषद की 5 सीटों में महायुति को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।
बीजेपी नेताओं ने हार के लिए शिंदे गुट पर सहयोग न करने का आरोप लगाया।
शिंदे ने आरोप खारिज कर गठबंधन धर्म निभाने की बात कही।
Maharashtra BJP Shinde Sena Conflict: महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 सीटों पर हुए चुनाव में सत्ताधारी महायुति सिर्फ 2 सीट जीतने में कामयाब रही। खास तौर से बीजेपी को 2 सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। इस वजह से महायुति में रार शुरू हो गई है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना की गद्दारी की वजह से हमें हार मिली। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में महायुति का हिस्सा रही शिवसेना ने पुणे और नागपुर में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
पुणे में अंतिम समय पर सचिन सानप को समर्थन देकर शिवसेना ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया। इससे महायुति कमजोर हुई। जो वोट विपक्ष को मिले, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा को मिल सकते थे।
बन ने आगे कहा कि छत्रपति संभाजीनगर में शिंदे सेना के कद्दावर नेता अब्दुल सत्तार ने महायुति में सहयोगी राकां सुनेत्रा पवार गुट के खिलाफ खुलकर प्रचार किया। गठबंधन के ही सहयोगी दल के खिलाफ इस तरह का प्रचार महायुति के लिए आत्मघाती साबित हुआ।
बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर ने पुणे स्नातक सीट पर मिली हार का ठीकरा शिंदे सेना पर फोड़ते हुए कहा कि बिना ऊपर से मिले आदेश के ऐसा भीतरघात नहीं हो सकता है। दरेकर ने कहा कि पुणे में शिंदे सेना के नेता रवीन्द्र धंगेकर ने अंदर से खेला किया।
शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि भाजपा को अब यह तय करना चाहिए कि वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ अपना गठबंधन जारी रखना चाहती है या नहीं।
नागपुर स्नातक सीट पर हार से बीजेपी बौखलाई हुई है। बीजेपी को आरएसएस और सीएम देवेंद्र फडणवीस के गढ़ में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी उम्मीदवार सुधाकर कोहले को काफी उलटफेर के बाद पराजित कर दिया।
डीसीएम शिंदे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना ने हमेशा गठबंधन के सिद्धांत का पालन किया है और आगे भी करती रहेगी। शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन चार जगहों पर था। पुणे शिक्षक सीट पर हमने निर्दलीय का समर्थन किया था और यहां बीजेपी से दोस्ताना मुकाबला था।
शिंदे गुट के विधायक रवीन्द्र धंगेकर ने शिंदे को फिर से सीएम बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि टीचर्स और ग्रेजुएट ने सरकार के खिलाफ वोट किया और उसके काम पर नाराजगी जताई। इस बात पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि शिक्षकों और सरकार के बीच करीबी रिश्ते होने के बावजूद सरकार के खिलाफ वोट क्यों किया।