

Marathi Language Mandatory: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'मराठी अस्मिता' और भाषा का मुद्दा गरमा गया है। राज्य के परिवहन विभाग ने टैक्सी और रिक्षा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इस गरमाते विवाद के बीच राज्य के CM Devendra Fadnavis ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि भाषा के नाम पर किसी के साथ हिंसा या जबरदस्ती नहीं की जाएगी, बल्कि सरकार चालकों को मराठी सीखने में मदद करेगी।
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने मोटर वाहन नियमों के नियम 4, 78 और 85 में संशोधन का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा है। इस नए प्रस्ताव के अनुसार:
यह मुद्दा तब उठा जब भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने शिकायत की थी कि कई बाहरी और विदेशी नागरिकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल कर लिए हैं।
इस संवेदनशील मुद्दे पर CM Devendra Fadnavis ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य भाषा का प्रचार करना है, न कि विवाद पैदा करना। उन्होंने कहा कि "मुंबई हो या पूरा महाराष्ट्र, मराठी को प्राथमिकता देना हमारा कर्तव्य है। लेकिन हमारी सरकार यह मानती है कि किसी पर भी भाषा थोपकर हिंसा करना गलत है। जिन चालकों को मराठी नहीं आती, उन्हें हम मराठी भाषा सिखाएंगे। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि किसी पर अन्याय न हो।"
इसी दौरान, जब CM Devendra Fadnavis से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों और नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबरों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर तीखा प्रहार किया। राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के संदर्भ में उन्होंने कहा "आम आदमी पार्टी ने हमेशा खुद को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का बुर्का पहनकर रखा, असल में वे केवल सत्ता की राजनीति कर रहे थे। अब उनका असली चेहरा सामने आ रहा है और उनके अपने ही लोग इस दिखावे से ऊब चुके हैं।
एक तरफ जहां राज्य सरकार मराठी भाषा को प्रशासन और जन-सेवा में अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ देवेंद्र फडणवीस ने इसे एक समावेशी मोड़ देने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार 'मराठी' के मुद्दे पर अडिग है, लेकिन वह इसे लोकतांत्रिक और सहयोगात्मक तरीके से लागू करेगी। दूसरी ओर, 'आप' पर उनके हमले ने राज्य में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां और तेज कर दी हैं।