महाराष्ट्र में सुपरफास्ट होगा भू-मापन, अब हर जिले में होगी निजी सर्वेक्षकों की नियुक्ति

Maharashtra Land Survey Reform: महाराष्ट्र सरकार ने जमीन की पैमाइश प्रक्रिया तेज और अनियमित बनाने के लिए हर जिले में निजी लाइसेंसधारी सर्वेक्षकों की नियुक्ति का फैसला किया है।
maharashtra land survey fast private surveyors appointment devendra fadnavis bawankule
Maharashtra land survey reform (सोर्सः सोशल मीडिया)
Updated on

Maharashtra Government: महाराष्ट्र में जमीन की पैमाइश (मोजणी) के लिए अब नागरिकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने जमीन संबंधी प्रकरणों का निपटारा सटीक, त्वरित और पारदर्शी तरीके से करने के लिए हर जिले में प्रशिक्षित लाइसेंसधारी निजी सर्वेक्षक (भूमापक) और एजेंसियों की नियुक्ति करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस योजना को हरी झंडी दे दी है।

वर्तमान में जमीन की पैमाइश का कार्य भूमि अभिलेख विभाग द्वारा किया जाता है। लेकिन आवेदनों की बढ़ती संख्या और सरकारी जनशक्ति (मैनपावर) की कमी के कारण हजारों मामले लंबे समय से लंबित पड़े थे। इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए राजस्व मंत्री ने तकनीकी रूप से सक्षम निजी एजेंसियों को इस प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया है। इससे न केवल सरकारी मशीनरी पर बोझ कम होगा, बल्कि आम जनता को भी अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनेगी समिति

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है। समिति में एनआईसी (एनआईसी) के तकनीकी सलाहकार, आईटीआई के प्राचार्य और जिला भूमि अभिलेख अधीक्षक शामिल होंगे। यह समिति कार्यप्रणाली, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और पैमाइश का समयबद्ध कार्यक्रम निर्धारित करेगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी निजी सर्वेक्षकों को 'ई-मोजणी 2।0' सॉफ्टवेयर का उपयोग करना अनिवार्य होगा। साथ ही, प्रत्येक सर्वेक्षक को हर महीने कम से कम 20 मामलों का निपटारा करना होगा।

पात्रता और प्रशिक्षण के कड़े नियम

इस कार्य के लिए योग्यता के मानक भी तय किए गए हैं। आईटीआई (सर्वेइंग), सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा या डिग्री और जियो-इंफॉर्मेटिक्स के स्नातक इस पद के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा, 10 साल का अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त सरकारी सर्वेक्षक भी 65 वर्ष की आयु तक यह काम कर सकेंगे। चयनित उम्मीदवारों को भूमि अभिलेख विभाग द्वारा दो सप्ताह का कड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को छत्रपती संभाजीनगर स्थित 'लैंड रिकॉर्ड ट्रेनिंग एकेडमी' द्वारा दो साल के लिए वैध लाइसेंस जारी किया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर लगाम और विकास को गति

राजस्व मंत्री बावनकुले ने बताया कि जमीन की पैमाइश न होने के कारण कई औद्योगिक और व्यावसायिक परियोजनाएं रुकी हुई थीं, जिससे राज्य की प्रगति बाधित हो रही थी। अब ऑनलाइन मानचित्र और दस्तावेज अपलोड होने के बाद भूमि अभिलेख विभाग के उप-अधीक्षक इसे अंतिम मंजूरी देंगे।

मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि इस कार्य में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या आपराधिक कृत्य सामने आता है तो संबंधित सर्वेक्षक का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था से आम आदमी का समय और पैसा दोनों बचेंगे।

Navbharat Live
navbharatlive.com