

Maharashtra Intern Doctors Stipend Hike Demand: महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन अब काफी तेज हो गया है। एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के बैनर तले गुरुवार को मुंबई के प्रसिद्ध जे.जे. अस्पताल में सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों की मुख्य और एक सूत्रीय मांग है कि उनके मौजूदा मासिक स्टाइपेंड को 18,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 30,000 रुपये किया जाए, ताकि वे महंगे होते महानगरों में अपने जीवनयापन का खर्च ठीक से उठा सकें।
मुंबई में प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर का कहना है कि दूसरे राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में इंटर्न्स को मिलने वाला मानदेय काफी कम है। उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 25,000 या उससे अधिक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
इसके विपरीत, मुंबई जैसे महंगे शहर में जहां रहना और खाना बेहद खर्चीला है, वहां इंटर्न्स को केवल 18,000 रुपये ही मिल रहे हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि यह राशि वर्तमान आर्थिक हालात और उनके द्वारा किए जाने वाले कड़े काम के मुकाबले बेहद कम और अन्यायपूर्ण है।
मुंबई के जे.जे. अस्पताल में प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है। वे पिछले कई महीनों से यह मामला मंत्री, राज्य प्रशासन, अस्पताल प्रशासन और डीन के सामने उठा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से जल्द से जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया है।
एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के महासचिव डॉ. रमन पवार ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग, अस्पताल प्रशासन के साथ हुई बातचीत, राज्यव्यापी प्रदर्शन की रूपरेखा, आगे की रणनीति और ड्यूटी के घंटों को लेकर अपनी बात रखी।
डॉ. रमन पवार ने कहा कि यह मुद्दा आज का नहीं है, यह 2024 से चल रहा है। उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों ने 2024 में इसको लेकर प्रदर्शन किया था, तब ही मांग की गई थी कि स्टाइपेंड 30,000 रुपये होना चाहिए, लेकिन सरकार ने उस समय कोई कदम नहीं उठाया। हम आज फिर उसी मांग को लेकर खड़े हैं।
ASMI के महासचिव डॉ. रमन पवार ने बताया कि अगस्त महीने में हमने शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और उनके प्रधान सचिव सहित सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र दिए। अगस्त से लेकर अक्टूबर तक हम लगातार पत्र सबमिट कर रहे हैं।
डॉ. पवार ने आगे बताया कि सितंबर में हमने फिर से एक रिक्वेस्ट लेटर डाला और सरकार को 15 से 20 दिन का ग्रेस पीरियड दिया ताकि वे जवाब दे सकें, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फिर 20 दिन बाद 5 अक्टूबर को हमने पुनर्विचार के लिए एक और पत्र डाला, जिसका पूरा प्रिंटआउट और रिसीव्ड कॉपी मेरे पास मौजूद है। उसके बाद भी हमने 10 दिन इंतजार किया, फिर भी कोई जवाब नहीं मिला।
ASMI के महासचिव ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। दो बार मुलाकात भी हुई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। किसी भी बैठक की तारीख तय नहीं हुई और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिसके कारण यह मामला अभी तक सुलझ नहीं पाया है।
डॉ. रमन पवार ने बताया कि यह प्रदर्शन केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। यह विरोध प्रदर्शन पूरे महाराष्ट्र में हो रहा है। हम पूरे राज्य के इंटर्न्स इस आंदोलन में शामिल हैं।
अस्पताल प्रशासन के स्तर पर हुई बातचीत को लेकर ASMI के महासचिव ने बताया कि पिछले तीन महीनों में हमने अपने डीन को तीन बार पत्र दिए हैं। डीन की तरफ से भी एक प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) को भेजा गया है। डीएमईआर को भी हमने पिछले तीन महीनों में लगभग छह पत्र दिए हैं।
डॉ. रमन पवार के मुताबिक उन्होंने अपना प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया है। सवाल यही है कि जब फाइल वित्त मंत्रालय तक पहुंच गई है, तो फिर अब तक निर्णय क्यों नहीं लिया गया? हमें और कितने दिन इंतजार करना पड़ेगा?
डॉ. रमन पवार ने कहा कि आज हम साइलेंट प्रोटेस्ट कर रहे हैं। हमने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अगर महाराष्ट्र सरकार 1 नवंबर तक कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो 2 नवंबर से हम हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।