राज्य में ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ अभियान को मिली नई रफ्तार, 5,010 स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
Health Worker Training: 'मेरा गांव, स्वस्थ गांव' अभियान के तहत महाराष्ट्र में 116 प्रशिक्षण बैच पूरे हुए। 5,010 स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मियों को आयुष्मान भारत के 13 सेवा पैकेजों पर प्रशिक्षित किया गया।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
स्वास्थ्य कर्मियों को मिला प्रशिक्षण (सोर्स: AI)
Maharashtra Health Worker Training: ‘मेरा गांव, स्वस्थ गांव’ अभियान को नई गति देने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सक्षम, गुणवत्तापूर्ण और जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है।
आयुष्मान भारत-समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के तहत आयोजित इस अभियान में अब तक 116 प्रशिक्षण बैच पूरे हो चुके हैं, जिनमें 5,010 हेत्थ अफसर और कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से आयुष्मान भारत के 13 सेवा पैकेजों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कर्मचारियों को दि जा रही प्रशिक्षण
यह अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर के मार्गदर्शन में, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. निपुण विनायक, सचिव ई. रवींद्रन, स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. विजय कंदेवाड के पर्यवेक्षण में चलाया जा रहा है।
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राज्य के सभी तालुकाओं में स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य सहायक, स्वास्थ्य सेवक, स्वास्थ्य सेविका, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी, आशा पर्यवेक्षक और आशा स्वयंसेविकाओं सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व उपकेंद्र स्तर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रत्येक जिले से 10 प्रशिक्षकों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखने के लिए अनुभवी मेंटर्स तथा जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है।
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रेफरल सेवाओं का कराया जा रहा व्यावहारिक अनुभव
इस प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल कक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रतिभागियों को सीधे गांवों में ले जाकर व्यावहारिक अनुभव कराया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर नागरिकों से स्वास्थ्य संबंधी संवाद करते हैं, परिवारों को स्वच्छता, पोषण और रोगों की रोकथाम के बारे में जागरूक करते हैं।
साथ ही बीमारियों की शुरुआती पहचान, जोखिम वाले व्यक्तियों का चिन्हांकन और जरूरतमंद मरीजों को उचित स्वास्थ्य संस्थानों तक रेफर करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया जाता है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यकुशलता बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और जन-केंद्रित बनाना है।
