महाराष्ट्र में जल्द लागू होगी समान नागरिक संहिता! UCC पर विधानसभा में फडणवीस सरकार का बड़ा ऐलान

Maharashtra Govt On UCC: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर विधानसभा में तीखी बहस हुई। गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने बताया कि रिटायर्ड जज की कमेटी इसका ड्राफ्ट तैयार कर रही है।
Maharashtra Govt On Uniform Civil Code
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Uniform Civil Code In Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिला।

तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के अधिकार पर हंगामा

विधानसभा में भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं को होने वाली प्रताड़ना का मुद्दा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया। फरांदे ने दावा किया कि बीते डेढ़ महीने में तीन पीड़ित मुस्लिम महिलाएं न्याय की गुहार लेकर उनके पास पहुंची थीं। उन्होंने सदन को बताया कि पुलिस ने आरोपियों पर केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन पीड़ित महिलाओं को अब तक वास्तविक न्याय नहीं मिला है। विधायक देवयानी फरांदे एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक पीड़िता को अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी जा रही है, वहीं दूसरी महिला पर उसके पति ने जानलेवा हमला करने की कोशिश की।

यूसीसी का मसौदा तैयार करने विशेष समिति का गठन

भाजपा विधायक द्वारा उठाए गए इस गंभीर मुद्दे का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने महायुति सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाते हुए कहा राज्य सरकार समान नागरिक संहिता विधेयक को लेकर 100 प्रतिशत सकारात्मक है। इसके कानूनी मसौदे को तैयार करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक विशेष समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है और यह कमेटी वर्तमान में तेजी से काम कर रही है।

'मुद्दे को मजहब के चश्मे से न देखें'

जब सदन में तीन तलाक और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर तीखी बहस चल रही थी, तभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की विधायक सना मलिक ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। सना मलिक ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और अत्याचारों को किसी एक धर्म या मजहब के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की ऐसी घटनाएं सिर्फ मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के साथ ही होती हैं?

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