राज्य के चैरिटेबल अस्पतालों पर सरकार का शिकंजा, गरीबों का करना होगा इलाज, विधानसभा में सीएम की घोषणा

Devendra Fadnavis Announcement: महाराष्ट्र सरकार ने चैरिटेबल अस्पतालों को आयुष्मान भारत और महात्मा फुले योजना के तहत गरीब मरीजों का इलाज अनिवार्य करने की घोषणा की है।
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Ayushman Bharat Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Ayushman Bharat Maharashtra: चैरिटेबल अस्पताल के रूप में पंजीकृत राज्य के निजी अस्पतालों को सरकारी हेल्थ स्कीम के तहत गरीब मरीजों का इलाज करना होगा। ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में की। मंगलवार को राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि मुंबई सहित राज्य के सभी चैरिटेबल अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना को एक साथ लागू करना जरूरी है।

कानून में होगा बदलाव

सीएम ने कहा कि इसी सत्र में कानून में बदलाव करने वाला एक बिल भी लाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चैरिटेबल अस्पताल रिजर्व फंड का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से कर रहे हैं या नहीं।

ज्यादातर निजी अस्पतालों में सरकारी स्कीम नहीं

राज्य के ज्यादातर निजी धर्मादाय अस्पतालों द्वारा सरकारी हेल्थ स्कीम लागू न करने को लेकर विधायक भीमराव तपकीर के उठाए सवाल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि चैरिटेबल अस्पतालों के लिए गरीब और कमजोर तबके के मरीजों को मुफ्त और सब्सिडी वाला इलाज देना अनिवार्य है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

134 अस्पतालों में मिल रहा लाभ

बताया गया कि राज्य भर के सभी 479 चैरिटेबल अस्पतालों को कानून के दायरे में लाया गया है। इसके बावजूद अब तक केवल 134 अस्पतालों ने ही आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना लागू कर गरीब मरीजों का इलाज शुरू किया है।

हालांकि, साधु वासवानी मिशन और कुछ अन्य अस्पतालों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष विस्तृत विवरण जमा करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इसके अनुसार लगभग दो महीने में निर्णय लिया जाएगा।

रिजर्व बेड की जानकारी

राज्य के सभी चैरिटेबल अस्पतालों में रिजर्व बेड का विवरण सरकारी डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। गरीब मरीजों की सहायता के लिए हर अस्पताल में ‘आरोग्य दूत’ नियुक्त किए गए हैं। इसके बावजूद कई बड़े चैरिटेबल अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं।

इन अस्पतालों को गरीब मरीजों के इलाज पर फंड का 2 प्रतिशत खर्च करना होता है, लेकिन कुछ अस्पताल खर्च किए बिना ही झूठे बिल दिखाकर सरकार को गुमराह कर रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि रिजर्व फंड के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए इसी सत्र में कानून में बदलाव कर सरकार चैरिटेबल अस्पतालों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

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