महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिल पर घमासान, कांग्रेस ने वसूली पर रोक लगाने की उठाई मांग

Maharashtra Electricity Bill: महाराष्ट्र में बढ़े बिजली बिलों के खिलाफ कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राकेश शंकर शेट्टी के नेतृत्व में 16 जुलाई को मुलुंड में बिजली विभाग के अधिकारियों से मिलेगा।
Maharashtra Congress delegation led by Rakesh Shankar Shetty to meet electricity officials in Mulund on July 16 over inflated power bills and consumer relief.
बिजली बिल (फोटो.सोशल मीडिया)
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Maharashtra Power Bill Row: महाराष्ट्र में कथित तौर पर बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की मांग के साथ महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल 16 जुलाई को बिजली विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करेगा। इस दौरान विवादित बिजली बिलों की जांच और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा जाएगा।

राकेश शंकर शेट्टी के नेतृत्व में पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता राकेश शंकर शेट्टी के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रभावित उपभोक्ता मुलुंड स्थित कार्यकारी अभियंता कार्यालय पहुंचेंगे। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतों को अधिकारियों के सामने उठाना और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

कांग्रेस का कहना है कि कथित रूप से बढ़े हुए बिजली बिलों के कारण मध्यम वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, छोटे व्यापारी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। पार्टी का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक बिजली खपत से अधिक बिल भेजे गए हैं और शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उनका समाधान नहीं हो रहा है।

बिल जांच, मीटर परीक्षण और संशोधन की मांग

प्रतिनिधिमंडल बिजली विभाग से मांग करेगा कि विवादित बिजली बिलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित उपभोक्ताओं के बिजली मीटरों की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि गड़बड़ी मिलती है तो बिलों में आवश्यक संशोधन किया जाए।

वसूली और बिजली काटने की कार्रवाई पर रोक की मांग

कांग्रेस यह भी मांग करेगी कि जब तक विवादित बिलों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित उपभोक्ताओं से बिल वसूली, जुर्माना लगाने और बिजली कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। पार्टी का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और उनकी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।

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