महाराष्ट्र में ‘राज्य विरोधी अपराध’ मामले घटे, NCRB रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आकड़े
Mumbai News: NCRB रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र 2023 में राज्य विरोधी अपराधों में गिरावट आई है। 2021 में 218 से घटकर ये मामले 169 रह गए है। महाराष्ट्र इस श्रेणी में सातवें स्थान पर है।
- Written By: सोनाली चावरे
महाराष्ट्र NCRB रिपोर्ट (pic credit; social media)
Maharashtra Anti-State Crime Cases: अपराध की खबरें अक्सर चिंता बढ़ा देती हैं, लेकिन इस बार महाराष्ट्र से राहत भरी खबर आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में ‘राज्य के विरुद्ध अपराध’ में कमी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां 218 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2022 में ये घटकर 174 पर आ गए और 2023 में और कम होकर 169 रह गए। यानी लगातार तीन साल से महाराष्ट्र में राज्य विरोधी अपराधों में गिरावट देखी जा रही है।
राज्य विरोधी अपराधों की श्रेणी में देशद्रोह, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और आधिकारिक गोपनीयता कानून जैसे मामले शामिल होते हैं। महाराष्ट्र इस श्रेणी में देशभर में सातवें स्थान पर है।
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इस सूची में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा जहां 2023 में 1,749 मामले दर्ज हुए। तमिलनाडु 834 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर और असम 278 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर रहा। महाराष्ट्र के मुकाबले इन राज्यों में आंकड़े कहीं ज्यादा हैं।
महाराष्ट्र में 2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए यानी राजद्रोह का केवल एक मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों के तीन मामले सामने आए। सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत 163 मामले दर्ज हुए, जबकि यूएपीए और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एक-एक केस दर्ज किया गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि महाराष्ट्र जैसे बड़े और औद्योगिक राज्य में यह गिरावट सकारात्मक संकेत है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है कि इन मामलों पर पूरी तरह रोक कैसे लगाई जाए।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। जहां सत्ता पक्ष इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि असल तस्वीर तभी बदलेगी जब छोटे अपराधों और संगठित अपराधों पर भी सख्ती से लगाम लगाई जाएगी।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की यह तस्वीर राहत देती है कि यहां राज्य विरोधी अपराध घटे हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रह पाएगी या फिर आंकड़े एक बार फिर बढ़ेंगे।
