

Mahalaxmi Mumbai Indias First Travelator Skywalk: आने वाले समय में मुंबईकरों के लिए एक और सौगात मिलने वाली है। MMRDA ने महालक्ष्मी मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का लगभग 90% काम पूरा कर लिया है। यह देश का पहला ऐसा स्काईवॉक होगा जिसमें एयरपोर्ट की तरह ट्रैवेलेटर लगे होंगे और यह तीनों सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़ेगा।
इस इंटीग्रेटेड इंटरचेंज के जरिए संत गाडगे महाराज चौक मोनोरेल स्टेशन, मेट्रो लाइन-3 और महालक्ष्मी उपनगरीय रेलवे स्टेशन आपस में जुड़ जाएंगे। एक बार शुरू होने के बाद यात्रियों का ट्रांसफर समय करीब 20 मिनट कम और आसान हो जाएगा। दक्षिण मुंबई और वर्ली से मोनोरेल तक पहुंच भी सुलभ होगी। इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है।
यह लगभग 283 मीटर लंबा इंटीग्रेटेड पैदल पुल है। 11 मीटर चौड़ा ढांचा, जिससे यात्रियों की आवाजाही सहज होगी। यहां कुल 176 मीटर लंबे 6 ट्रैवेलेटर लगाए गए हैं। इसके साथ दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए 2 पैसेंजर लिफ्ट। हर घंटे लगभग 4,500 यात्रियों को संभालने की क्षमता।
मुंबई के सबसे ज्यादा यूटिलिटी वाले कॉरिडोर में से एक में यह पुल बना है। निर्माण से पहले 1800 मिमी व्यास वाले तेज नाले को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया गया। पानी और सीवेज की लाइनें बिना बाधा के चालू रहीं, जिससे नागरिक सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं।प्रोजेक्ट के दौरान एक भी पेड़ नहीं काटा गया। ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय कर ट्रैफिक मैनेज किया गया। साने गुरुजी मार्ग पर होने वाले वार्षिक गणेश विसर्जन जुलूस भी बिना रुकावट चलते रहे।
MMRDA के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक पैदल पुल नहीं है। यह मुंबई के लिए एकीकृत सार्वजनिक परिवहन तंत्र की दिशा में बड़ा कदम है, जहां मेट्रो, मोनोरेल और लोकल एक साथ जुड़ेंगे ।
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इस प्रोजेक्ट से दफ्तर जाने वाले, छात्रों और पर्यटकों सभी को फायदा होगा। महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन, वर्ली और दक्षिण मुंबई के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने से सड़क पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। MMRDA का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में शेष 10% काम पूरा कर इसे नागरिकों के लिए खोल दिया जाए।