

Mumbai Suburban Rail Development: मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था को भविष्य की बढ़ती यात्री संख्या के अनुरूप तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) ने मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट MUTP-4 के तहत व्यापक तकनीकी सहायता अध्ययन शुरू किया है। इस स्टडी में वर्ष 2030, 2035, 2040 और 2047 के लिए संभावित यात्री मांग का अनुमान लगाकर मुंबई की रेल व्यवस्था के विस्तार और आधुनिकीकरण की परियोजनाएं तैयार की जाएंगी।
अध्ययन का फोकस केवल नई रेल लाइन बिछाने तक सीमित नहीं रहेगा। मौजूदा कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने, फास्ट और स्लो लोकल के लिए अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध कराने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की संभावनाओं का भी तकनीकी परीक्षण किया जाएगा।
मुंबई की रेल व्यवस्था को MUTP-4 की स्टडी में उपनगरीय और मेनलाइन ट्रैफिक को अलग करने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इससे लोकल ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है।
फास्ट और स्लो लोकल सेवाओं के लिए अतिरिक्त ट्रैक की जरूरत, 15-कार लोकल चलाने के लिए प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने और अधिक यात्री दबाव वाले क्षेत्रों में नए टर्मिनल विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन होगा।
मुंबई महानगर क्षेत्र में विकसित हो रहे नए केंद्रों को भी भविष्य की रेल योजना से जोड़ा जाएगा। NAINA और KSC न्यू टाउन जैसे नए विकास क्षेत्रों में भविष्य की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशने की योजना है।
मुंबई की रेल व्यवस्था MUTP-4 में यात्रियों की सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत ‘मिशन जीरो डेथ’ के अंतर्गत रेल हादसों में होने वाली मौत और चोट के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
रेल पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश और स्टेशनों के साथ-साथ दो स्टेशनों के बीच ट्रेसपासिंग की समस्या को भी अध्ययन में शामिल किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों के अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए स्टेशनों पर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम लागू करने की व्यवहार्यता की भी जांच की जाएगी।
इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं के संभावित कारणों की पहचान कर उन्हें तकनीकी और ढांचागत उपायों से कम करना है।
स्टेशन आधुनिकीकरण के तहत मुंबई के करीब 40 शेष उपनगरीय स्टेशनों का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसमें प्लेटफॉर्म की लंबाई और क्षमता बढ़ाने के साथ यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए फुट ओवरब्रिज डेक, एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी सुविधाओं की जरूरत का परीक्षण होगा।
स्टेशनों के प्रवेश और निकास मार्गों को भी बेहतर बनाने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा बस, मेट्रो और परिवहन के अन्य साधनों के साथ बेहतर इंटरमोडल कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी।
रेल सुरक्षा और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी अध्ययन किया जाएगा। इसमें कवच 5.0, उन्नत सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) जैसी प्रणालियों की उपयोगिता और व्यवहार्यता का परीक्षण शामिल है।
इसके साथ अतिरिक्त एसी ईएमयू की जरूरत, बिजली आपूर्ति व्यवस्था, स्टेबलिंग लाइन और ईएमयू के रखरखाव के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी आकलन किया जाएगा।
अध्ययन के आधार पर जिन परियोजनाओं को प्राथमिकता के योग्य माना जाएगा, उनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इससे मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था के लिए आने वाले वर्षों की परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का आधार तैयार होगा।