

Kanjurmarg Waste Project Control Plan: कांजूरमार्ग स्थित कचरा प्रसंस्करण परियोजना से उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और मिथेन गैस की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बीएमसी ने अब कमर कस ली है।
घनकचरा विभाग के उपायुक्त किरण दिघावकर ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए बीएमसी की तरफ से कॉम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजना (सीबीजी), हरित सुरक्षा पट्टी और 'वेस्ट टू एनर्जी' परियोजना विकसित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस संबंध में महानगर गैस लिमिटेड के साथ महत्वपूर्ण करार भी किया गया है और दिसंबर 2027 तक सीबीजी परियोजना को पूरी तरह कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि सिर्फ गैस नियंत्रण ही नहीं, बल्कि दुर्गंध रोकने के लिए परियोजना परिसर के चारों ओर 500 मीटर चौड़ी 'ग्रीन बफर जोन' भी तैयार की जाएगी। इसके तहत 18 से 20 फीट ऊंचाई वाले लगभग 2,200 पेड़ तथा 8 से 12 फीट ऊंचाई वाले 15 हजार पौधों का तीन स्तरों में रोपण किया जाएगा।
इस 'ग्रीन फेंसिंग' से दुर्गंध के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, वर्तमान में बाहरी हिस्से में स्थित कचरा वर्गीकरण परियोजना को अंदर स्थानांतरित किया जाएगा, हालांकि मिथेन गैस में स्वयं कोई गंध नहीं होती, लेकिन कचरे में मौजूद सल्फर और अमोनिया से उत्पन्न दुर्गंध का पता लगाने के लिए परिसर में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे।
विशेष रूप से रात के समय बढ़ने वाली समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए नियंत्रण कक्ष और अभियंताओं की रात्रि पाली भी तैनात की जाएगी। इसके अतिरिक्त, दीवाली तक 8 मेगावाट क्षमता की 'वेस्ट टू एनर्जी' परियोजना शुरू करने की भी महानगरपालिका की योजना है, जिससे कचरा प्रबंधन को और गति मिलेगी।
बता दें कि कांजूरमार्ग क्षेत्र के रहवासियों द्वारा दुर्गंध को लेकर की गई शिकायतों के बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष समिति के निर्देशानुसार मनपा ने ये तात्कालिक उपाय शुरू किए हैं। किरण दिघावकर ने बताया कि गीले कचरे से प्राकृतिक रूप से मिथेन गैस उत्पन्न होती है और कचरा खुले में रहने पर इसका उत्सर्जन बढ़ने से दुर्गंध फैलती है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के अनुसार मिथेन नियंत्रण के लिए सीबीजी परियोजना ही एकमात्र वैज्ञानिक समाधान है। इस परियोजना में कचरे से निकलने वाली मिथेन गैस को एकत्र कर पाइप गैस में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए मनपा ने महानगर गैस को आठ एकड़ जमीन हस्तांतरित की है।
प्रतिदिन लगभग 350 से 500 टन गीले कचरे पर प्रक्रिया कर उससे 16 टन गैस का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में मुंबई में उत्पन्न कुल कचरे का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा गीला कचरा होने के कारण मीथेन की मात्रा अधिक है, जिस पर यह परियोजना प्रभावी साबित होगी, ऐसा विश्वास दिघावकर ने व्यक्त किया। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने बुधवार तड़के परियोजना स्थल का आकस्मिक निरीक्षण किया।