मुंबई: कांदिवली के बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल की एलिसा मशीन 3 महीने से बंद, डेंगू जांच प्रभावित

Mumbai BMC Hospital News: कांदिवली के आंबेडकर अस्पताल में 3 महीने से एलिसा मशीन बंद है। डेंगू और लेप्टोस्पाइरोसिस की जांच ठप्प होने से मरीजों को निजी लैब में महंगा खर्च उठाना पड़ रहा है।
ELISA machine at Kandivali's Ambedkar Hospital non-functional for 3 months. Patients face high costs at private labs for Dengue & Leptospirosis tests.
कांदिवली के आंबेडकर अस्पताल (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Kandivali Ambedkar Hospital: मुंबई में मानसून के दौरान डेंगू, लेप्टोस्पाइरोसिस और अन्य संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच कांदिवली स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल की एलिसा (ELISA) मशीन पिछले तीन महीनों से बंद पड़ी है। इससे डेंगू, लेप्टोस्पाइरोसिस, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी बीमारियों की पुष्टिकरण जांच प्रभावित हो रही है। अस्पताल में नई मशीन शुरू होने का भी इंतजार किया जा रहा है।

रैपिड टेस्ट के आधार पर शुरू हो रहा इलाज

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों का प्रारंभिक इलाज फिलहाल रैपिड टेस्ट के आधार पर शुरू किया जा रहा है। हालांकि, बीएमसी की आधिकारिक निगरानी प्रणाली में केवल ELISA या RT-PCR जांच से पुष्टि किए गए मामलों को ही दर्ज किया जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पुष्टिकरण जांच में देरी के कारण वास्तविक मामलों की रिपोर्टिंग भी प्रभावित हो सकती है।

मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में सात से आठ मरीजों की रैपिड टेस्ट में डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई थी। इनमें से कुछ मरीजों को एलिसा जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ा। निजी लैब में एक जांच के लिए ₹2,500 से ₹4,000 तक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

नई मशीन शुरू होने का इंतजार

मुंबई अस्पताल सूत्रों का कहना है कि नई एलिसा मशीन शुरू होने के बाद जांच सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल मरीजों और चिकित्सकों को सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल में जल्द नई मशीन चालू होने की मांग तेज हो गई है, ताकि संक्रामक रोगों की समय पर पुष्टिकरण जांच हो सके और मरीजों को निजी लैब का सहारा न लेना पड़े।

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