त्रिपुरा के राजपरिवार से महाराष्ट्र के राज्यपाल तक, कौन हैं जिष्णु देव वर्मा? जानें उनका राजनीतिक सफर
Jishnu Dev Varma Maharashtra Governor: देश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल। जिष्णु देव वर्मा बने महाराष्ट्र के नए राज्यपाल। तेलंगाना, बिहार और बंगाल समेत कई राज्यों में नए संवैधानिक प्रमुखों की नियुक्ति।
- Written By: प्रिया जैस
जिष्णु देव वर्मा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Administrative Reshuffle India 2026: भारत सरकार ने देश में एक बड़ा संवैधानिक फेरबदल किया है। इसके तहत, सरकार ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े संवैधानिक बदलाव किए हैं। महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के पदों में बदलाव किए गए हैं। तमिलनाडु में अतिरिक्त प्राभार नियुक्त किए गए हैं, जबकि दिल्ली और लद्दाख में उपराज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
महाराष्ट्र में तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तो वहीं, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र के लिए जिष्णु देव वर्मा के नाम की घोषणा की। जिष्णु देव वर्मा उत्तर-पूर्वी भारत के एक अनुभवी राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते है। उन्होंने त्रिपुरा राज्य की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आपको बताते चलें, कि त्रिपुरा के राजपरिवार से संबंध रखने वाले जिष्णु देव वर्मा को भाजपा का वरिष्ठ नेता माना जाता है। उन्होंने 2018 से 2023 तक त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और राज्य में वित्त, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभालते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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त्रिपुरा से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
जिष्णु देव वर्मा का जन्म 15 अगस्त 1957 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने समाजसेवा में प्रवेश किया। 1990 के दशक में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और यहां से उनकी सक्रिय राजनैतिक करियर की शुरुआत हुई।
त्रिपुरा में वामपंथी दलों का बड़ा प्रभुत्व था। इसके बावजूद, उन्होंने भाजपा के साथ काम करते हुए संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया। उन्होंने 1996, 1998 और 1999 में त्रिपुरा पूर्वी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
जिष्णु देव वर्मा की उपमुख्यमंत्री के तौर पर भूमिका
2018 में त्रिपुरा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, जिष्णु देव वर्मा को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौरान उन्होंने वित्त, ऊर्जा, योजना, पंचायत राज और ग्रामीण विकास जैसे विभागों का नेतृत्व किया।
2018 से 2023 तक त्रिपुरा के प्रशासन में जिष्णु देव वर्मा की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने आर्थिक नियोजन, ग्रामीण अवसंरचना और ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया। इसलिए, त्रिपुरा के विकास की प्रक्रिया में उनके नेतृत्व को उल्लेखनीय माना जाता है।
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माय नेता इन्फो के अनुसार, जिष्णु देव वर्मा के पास 2023 तक ₹15,58,60,395 की संपत्ति है। उन पर ₹6,47,101 का कर्ज भी है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को इस पद का अतिरिक्त प्राभार दिया गया था।
जिष्णु देव वर्मा का राज्यपाल पद तक का सफर
राजनीति में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें राज्यपाल नियुक्त किया गया। इससे पहले वे तेलंगाना के राज्यपाल रह चुके थे। उसके बाद उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। महाराष्ट्र जैसे बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में उनकी नियुक्ति को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिष्णु देव वर्मा की रुचियों की बात करें तो वे राजनीति के साथ-साथ साहित्य, कला और खेल में भी रुचि रखते हैं। वे ना सिर्फ एक पॉलिटिकल लीडर बल्कि एक कवि और लेखक के रूप में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं। इसके अलावा, वे बैडमिंटन से भी जुड़े हुए हैं और खेल संगठनों के साथ मिलकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
