

मुंबई: महाराष्ट्र में भले ही मराठी लोगों में हिंदी पर मराठी का जश्न मनाया जा रहा है। लेकिन राज्य के बाहर इस जश्न को एक लोकतंत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। मुंबई के वर्ली डोम में आज (5 जुलाई) को विजय मोर्चा निकाला जा रहा है। इस मोर्चे को लेकर जनता दल युनाइटेड और समाजवादी पार्टी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उनकी प्रतिक्रिया से साफ पता चलता है कि ये मोर्चा उत्तर-भारतीय नागरिकों को पसंद नहीं आ रहा है।
मुंबई में आज होने वाली 'विजय रैली' के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एकजुट होने पर जेडी(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, "जैसा कि महाराष्ट्र का इतिहास रहा है, दोनों भाइयों का एक साथ आना उत्तर भारतीयों के लिए एक खतरनाक संकेत है। जिस तरह से वे भाषा का मुद्दा, स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाते रहे हैं, वे जमीन हासिल करने के लिए एक साथ आ रहे हैं, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि 'मराठी मानुस' भी इन विभाजनकारी रणनीतियों में रुचि नहीं रखते हैं।"
जेडी(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि मराठी मानुस जानते हैं कि आज के समय में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा का ज्ञान होना कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए, कोई भी उनके बहकावे में नहीं आने वाला है।
ठाकरे बंधुओं की इस रैली का समाजवादी पार्टी ने विरोध किया। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने मुंबई में आज होने वाली 'विजय रैली' के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एकजुट होने पर कहा, "वे जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन अगर देश के किसी भी हिस्से में हिंदी भाषी लोगों की पिटाई होती है, तो यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा। देश सभी का है। मराठी लोग सभी के हैं और महाराष्ट्र के भी हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "देश के अंदर ऐसी ही तमाम शक्तियां है, जो देश को तोड़ना चाहती है, अलग करना चाहती है, फूट डालना चाहती है। अगर ऐसा फिर से शुरू हुआ तो समाजवादी पार्टी इसका विरोध करेगी।"
हिंदी भाषा को लेकर हुए इस विवाद पर उत्तर भारतीय पार्टियों ने इसे फूट डालना बताया। इससे ये साफ पता चलता है कि जल्द ही इंडिया गठबंधन पर गाज गिर सकती है। तो वहीं वर्ली डोम के मंच से उद्धव और राज ठाकरे ने एक साथ मराठी भाषा का विरोध कर रहे लोगों को चेताया है। उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा है कि दोनों का साथ लाने वाले सीएम देवेंद्र फडणवीस है। उन्होंने कहा कि जो बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए वो सीएम फडणवीस ने कर दिखाया।