दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर सुरक्षा कवच तैयार, 1,423 किमी रूट पर शुरू हुआ स्वदेशी ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम

Mumbai Rail Line: दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्वदेशी 'कवच 4.0' सिस्टम चालू। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि 2,569 रूट किमी पर कवच पूरी तरह एक्टिव है।
Indigenous Automatic Train Protection System Kavach 4.0 active on Delhi-Mumbai route; Railway Minister Ashwini Vaishnaw presents progress report.
ट्रेन (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
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Indian Railways Kavach 4 0 Active Delhi Mumbai Route: ट्रेन हादसों को जड़ से खत्म करने की दिशा में भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा कदम अब जमीन पर दिखने लगा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 20 जुलाई 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट लोकसभा में पेश करते हुए बताया कि स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' अब देश के सबसे व्यस्त और सबसे जोखिम वाले रूटों तक पहुंच चुका है।

इस बार सबसे बड़ी राहत दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के यात्रियों के लिए है। रेल मंत्रालय का टारगेट साफा है कि हाई ट्रैफिक कॉरिडोर को पहले कवर करना है। इस लिहाज से दिल्ली-मुंबई रूट का सबसे आगे निकलना इस बात का संकेत है कि अब सबसे ज्यादा भीड़ वाले सेक्शन पर यात्रियों को डबल सुरक्षा मिलेगी।

रेल मंत्री के लिखित जवाब के मुताबिक अब तक 2,569 रूट किलोमीटर पर कवच वर्जन 4.0 पूरी तरह चालू हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर का 1,423 रूट किमी है। इसके अलावा दिल्ली-हावड़ा पर 1,146 रूट किमी पर सिस्टम एक्टिव है।

तेजी से चल रहा कार्य

दिल्ली-मुंबई लाइन पर तिलक ब्रिज, पलवल, मथुरा, कोटा, नागदा, रतलाम, वडोदरा और विरार जैसे व्यस्त सेक्शन कवच से जुड़ चुके हैं। देश की आर्थिक राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ने वाला यह हाई डेसिटी रूट अब तकनीकी सुरक्षा के घेरे में आ गया है, साथ ही 21,858 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड कवच लगाने का काम

तेजी से चल रहा है। सरकार ने कहा कि प्राथमिकता उन्हीं मार्गों को दी जा रही है जहां ट्रेनों का दबाव सबसे ज्यादा है या हादसे की आशंका अधिक है। कवच सिर्फ सिग्नल नहीं, पूरा इकोसिस्टम है। इसके लिए ऑप्टिकल फाइबर, टेलीकॉम टावर, स्टेशन डेटा सेंटर और लोको में विशेष उपकरण लगाने पड़ते हैं।

आखिर कवच करता क्या है?

  • कवच भारतीय रेल का स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली सिस्टम है।
  • लोको पायलट अगर लाल सिग्नल पार करे तय स्पीड से ज्यादा रफ्तार हो जाए या समय पर ब्रेक न लगे तो कवच खुद दखल देकर ब्रेक लगा देता है। घने कोहरे और खराब मौसम में भी यह ट्रेन को सुरक्षित रखता है।
  • यह एक टक्कर रोधी यंत्र है जो ट्रेन में लगाया जाता है जिससे आमने-सामने की टक्कर होने से बच जाती है क्योंकि ट्रेन को पहले ही पता लग जाता है कि ट्रैक पर कोई दूसरी गाड़ी भी है।
  • पहला फील्ड ट्रायल 2016 में हुआ था। जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय ट्रेन सुरक्षा प्रणाली घोषित किया गया और जुलाई 2024 में कवच 4.0 को मंजूरी मिली थी।
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