

IIT Bombay Student Sahil Wakode Suicide Case: आईआईटी बॉम्बे में साहिल वाकोड़े की आत्महत्या के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुला को पद से हटा दिया है, वहीं दूसरी तरफ आईआईटी दिल्ली और मद्रास का फैकल्टी फोरम प्रोफेसर के सपोर्ट में आ गया है। एक तरह से अब ये लड़ाई छात्र बनाम फैकल्टी होती दिख रही है।
मामले में मंगलवार को संस्थान के छात्र प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन किया तो राजनीतिक दल भी विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। आईआईटी बॉम्बे ने कैंपस के हॉस्टल से सीलिंग फैन हटाकर दीवार पंखे लगाने निर्णय लिया है। संस्थान के इस फैसले की आलोचना की जा रही है।
छात्रों ने कहा कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों में मांगों का एक व्यापक खाका तैयार किया है और उसे औपचारिक रूप से आईआईटी बॉम्बे के निदेशक को सौंप दिया है। निदेशक ने निर्धारित समयसीमा के भीतर इन मांगों को लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है।
सूर्यनारायण डुला को प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटाए जाने के संबंध में छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य न तो उन्हें पहले से दोषी मानना था और न ही जारी जांच के नतीजे के बारे में पहले से कोई निष्कर्ष निकालना। उन्होंने कहा, हम अपने संकाय समुदाय के सदस्य के रूप में प्रोफेसर डुला के साथ खड़े हैं और हमारा मानना है कि जांच को निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।
आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम अध्यक्ष डॉ. राजकुमार पंत ने दावा किया कि पिछले सप्ताह कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्र साहिल वाकोडे ने हाल के दिनों में संस्थान के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ में कोई शिकायत नहीं की थी। उनकी यह टिप्पणी वाकोडे के परिवार द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि छात्र संस्थान के व्यवस्थागत उत्पीड़न का शिकार हुआ।
कोठेसर सूर्यनारायण दूला के खिलाफ दर्ज अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत मामला वापस लिया जाना चाहिए। इस कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है और इसमें सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू होनी चाहिए। आईआईटी सहित उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों के तनाव को कम करने के लिए परिसर के माहौल में लगातार सुधार करना चाहिए, वंचित और पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए कोचिंग और आपस में एक-दूसरे को सहयोग करने वाली व्यवस्था शुरू होनी चाहिए।।
सुधींद कुलकर्णी, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता
छात्रों में जब सुसाइडल टेंडेंसी आती है तब वो सबसे पहले इजीली अवेलेबल चीजों को देखते हैं और उसी के सहारे आत्महत्या करते हैं। इसलिए आईआईटी बॉम्बे के सीलिंग फैन हटाने का फैसला बिल्कुल सही है। लेकिन इससे सुसाइड रुक जाएंगे ये कहना सही नहीं होगा। उसके लिए ऐसे छात्रों को पहचान कर उनकी काउंसलिंग करनी होगी। इसके लिए संस्थान में एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जो ऐसे छात्रों की पहचान करें जो मानसिक रूप से परेशान हैं। साथ ही संस्थान में ही उनके लिए काउंसलिंग उपलब्ध हो। केईएम हॉस्पिटल में और कई संस्थानों में ऐसी सुविधा उपलब्ध है।
-प्रो. डॉ. शुभांगी पारकर, केईएम अस्पताल की पूर्व प्रोफेसर और डीन