IIT Bombay Darshan Solanki Case में बड़ा मोड़, सहपाठी पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप तय
IIT Bombay Darshan Solanki Case मौत मामले में अदालत ने सहपाठी अरमान खत्री पर आत्महत्या के लिए उकसाने और धमकी के आरोप तय किए हैं, जिससे अब नियमित ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
IIT Bombay Darshan Solanki Case (सौ. सोशल मीडिया )
IIT Bombay Darshan Solanki Case: आईआईटी-बॉम्बे के प्रथम वर्ष के छात्र दर्शन सोलंकी की मौत के करीब तीन साल बाद इस बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया ने अहम मोड़ ले लिया है।
मुंबई की एक विशेष अदालत ने सोलंकी के सहपाठी अरमान खत्री के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक धमकी के आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत में आरोप तय होने के बाद अब IIT Bombay Darshan Solanki Case में नियमित सुनवाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अरमान खत्री ने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन अदालत ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
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IIT Bombay Darshan Solanki Case की जांच में सामने आए अहम तथ्य
विशेष जांच दल (SIT) के अनुसार, एक कथित विवाद के बाद खत्री ने सोलंकी को ‘पेपर कटर’ से धमकाया था। जांच के दौरान सोलंकी के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जो फरवरी 2023 का बताया गया है। इसी दौरान 18 वर्षीय छात्र ने पवई स्थित छात्रावास की आठवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी।
पहले विवादों में रही थी जांच
घटना के बाद आईआईटी-बॉम्बे की आंतरिक जांच में जाति आधारित भेदभाव के आरोपों को खारिज कर दिया गया था। हालांकि, सोलंकी के परिवार ने लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग जारी रखी, जिसके बाद मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
साल 2023 में गिरफ्तारी और जमानत मिलने के बाद अरमान खत्री ने अपनी पढ़ाई जारी नहीं रखी। अब गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अदालत में सुनवाई शुरू होगी, जो इस मामले में न्याय की दिशा तय करेगी।
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न्याय की उम्मीद
यह मामला न केवल एक छात्र की दुखद मौत से जुड़ा है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और संवेदनशीलता के मुद्दों को भी सामने लाता है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
