अस्पतालों में मेडिकल सामग्री पर 2,841% तक का मुनाफा, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के खुलासे से हड़कंप

Maharashtra Hospital News: महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खुलासा किया है कि अस्पतालों में मेडिकल सामग्री पर मुनाफा 2,841% तक पहुंच चुका है। उद्योग ने सख्त नियमों की मांग की।
Uproar over Tukaram Mundhe's revelation of markups of up to 2,841% on medical supplies in hospitals
प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Tukaram Mundhe Hospital MRP Profit Margin Report: मुंबई अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा सामग्री की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली अधिकतम खुदरा कीमत के बीच भारी अंतर का मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के बाद चिकित्सा उपकरण उद्योग और विशेषज्ञों ने मौजूदा मूल्य व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज कर दी है।

2,841 प्रतिशत तक मुनाफे का दावा

तुकाराम मुंढे ने राज्य स्तरीय आधिकारिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली कुछ चिकित्सा सामग्रियों पर मुनाफे का स्तर 2,841 प्रतिशत तक पहुंचने की जानकारी दी है। उनके अनुसार, खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमत में इतना बड़ा अंतर मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।

हालांकि, यह आंकड़ा किन विशेष चिकित्सा उपकरणों या सामग्रियों पर लागू होता है, इसकी विस्तृत श्रेणीवार जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे सभी चिकित्सा सामग्रियों पर लागू सामान्य मुनाफे के रूप में नहीं देखा जा सकता।

चिकित्सा उद्योग ने उठाई व्यवस्था बदलने की मांग

चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल मुनाफे की अधिकतम सीमा तय करने से नहीं होगा। भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) की ओर से पहले ही एक ही औषधीय घटक के लिए समान लागत व्यवस्था का प्रस्ताव रखा जा चुका है। इसके तहत अलग-अलग कंपनियों के समान घटक वाले उत्पादों की कीमतों में अंतर को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है।

उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि चिकित्सा उपकरणों, प्रत्यारोपण और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री के लिए मूल्य निर्धारण की पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

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बीमा कंपनियों की छूट व्यवस्था पर भी सवाल

चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. दीपक बैद ने कहा कि केवल मुनाफे की सीमा तय करना पर्याप्त समाधान नहीं है। उन्होंने बीमा कंपनियों की ओर से दवा और प्रत्यारोपण के बिल पर छूट मांगने की व्यवस्था को भी समस्या का हिस्सा बताया।

उनके अनुसार, कई मामलों में अस्पतालों या चिकित्सा प्रतिष्ठानों को बीमा कंपनियों के साथ बिल पर छूट देनी पड़ती है। इससे होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए कभी-कभी फार्मेसी या अन्य मदों की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है। इसलिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच भुगतान तथा छूट की व्यवस्था की भी समीक्षा आवश्यक है।

कई चिकित्सा उपकरण कीमत नियंत्रण से बाहर

मौजूदा नियमों के तहत जरूरी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लागू है, लेकिन कई चिकित्सा उपकरणों और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर उसी तरह की सख्त मूल्य सीमा नहीं है। यही वजह है कि इन उत्पादों की खरीद कीमत, मुंबई अस्पताल की बिलिंग और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमतों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों के हित में खरीद कीमत, अस्पताल का मार्जिन और अंतिम बिलिंग को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि इलाज का खर्च अनावश्यक रूप से न बढ़े।

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