घाटकोपर सोसायटी का 'सफेद पट्टी' विवाद सुलझा; पुलिस की मध्यस्थता के बाद निकाला बीच का रास्ता, जानें क्या निकाला

Ghatkopar Society Dispute: मुंबई के घाटकोपर की एक सोसायटी में सड़क पर खींची गई सफेद पट्टी को लेकर उपजा विवाद अब शांत हो गया है। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया है।
Ghatkopar Society White Strip Dispute Resolved
पहले बनी सफेद पट्टियां, विवाद के बाद इस अलग-अलग रंगों से कलर कर दिया गया (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Ghatkopar Society White Strip Dispute Resolved: मुंबई के घाटकोपर पूर्व स्थित कैलास एवेन्यू सोसायटी में पिछले कुछ दिनों से जारी 'सफेद पट्टी' का विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले ने धार्मिक रंग ले लिया था, जिसे पुलिस की सूझबूझ और मध्यस्थता के बाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया।

क्या था पूरा विवाद?

मुंबई का घाटकोपर इलाका अपनी बहुसांस्कृतिक आबादी के लिए जाना जाता है। कैलास एवेन्यू सोसायटी में भी विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग रहते हैं। हाल ही में सोसायटी परिसर की सड़क पर एक सफेद रंग की पट्टी खींची गई थी। सोसायटी के ही एक निवासी प्रसाद वेदपाठक ने इस पट्टी पर कड़ी आपत्ति जताई और इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते यह मुद्दा गरमा गया और पूरी सोसायटी दो गुटों में बंट गई। कुछ लोग इस कदम के समर्थन में थे, तो वहीं कुछ इसका पुरजोर विरोध कर रहे थे। इंटरनेट पर वीडियो वायरल होने के कारण इस आंतरिक मतभेद ने देखते ही देखते धार्मिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया, जिससे परिसर में तनाव का माहौल बन गया था।

मुंबई पुलिस ने सुलझाया विवाद

इसके बाद इस मामले में मुंबई पुलिस ने दखल दिया, दोनों पक्षों की बात सुनी और मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में मदद की। हालांकि सोसाइटी प्रबंधन या निवासियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वेदपाठक ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि समस्या का समाधान हो गया है।

क्या निकला सफेद पट्टियों का समाधान?

प्रसाद वेदपाठक ने बताया कि विवाद के केंद्र में रही सफेद पट्टी को हटाकर उस पर दोबारा पेंट कर दिया गया है। उन सफेद पट्टियों को अगर रंग से रंग दिया गया है। किसी विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जा रहा है, तो उसे खत्म करके आगे बढ़ना भी उतना ही जरूरी है।

क्याें बनाई जाती है सफेद पट्टियां?

सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष दास ने कहा कि इस मुद्दे को धार्मिक विवाद का रूप देना गलत था। गर्मियों के दौरान कुछ इलाकों में सफेद पट्टियां बनाई जाती हैं। इसका उद्देश्य मॉनसून के दौरान काई (शैवाल) को पनपने से रोकना और छोटे जीव आसानी से दिखाई दें, ताकि वे पैरों के नीचे कुचले न जाएं। ये पट्टियां स्थायी नहीं होतीं।

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